Mumbai ट्रेन ब्लास्ट के 20 साल: इंसाफ का इंतजार कर रहे survivor, कोर्ट से सभी आरोपियों के बरी होने पर बढ़ा दर्द
Maharashtra: मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को आज 20 साल पूरे हो गए हैं। 11 जुलाई 2006 को हुए इन हमलों में 187 लोगों की जान गई थी। आज भी कई survivor अपने शरीर की अपंगता और मन के डर के साथ जी रहे हैं,
Maharashtra: मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को आज 20 साल पूरे हो गए हैं। 11 जुलाई 2006 को हुए इन हमलों में 187 लोगों की जान गई थी। आज भी कई survivor अपने शरीर की अपंगता और मन के डर के साथ जी रहे हैं, जिन्हें अब तक सही इलाज और इंसाफ नहीं मिला है।
पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 12 दोषियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील केस को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे और सबूत पुख्ता नहीं थे। इस फैसले ने उन पीड़ितों के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है जो सालों से दोषियों को सजा मिलने का इंतजार कर रहे थे। कई survivor का कहना है कि वे अब ट्रेन में सफर करने से डरते हैं और उन्हें सरकार की जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रहा।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कानूनी सलाह लेने और ATS की जांच में हुई कमियों को दूर करने के लिए नई टीम बनाने का भरोसा दिया था।
- 11 जुलाई 2006: मुंबई की वेस्टर्न रेलवे की ट्रेनों में 7 बम धमाके हुए, 187 मौतें हुईं।
- 12 मई 2015: स्पेशल MCOCA कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराया, जिनमें से 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद मिली थी।
- 21 जुलाई 2025: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी बताते हुए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया।
- जांच एजेंसी: ATS ने दावा किया था कि आरोपी SIMI और लश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में थे।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे आज भी महंगे प्रोस्थेटिक्स (नकली अंग) नहीं खरीद पा रहे हैं और सरकारी मदद ना के बराबर है। बरी हुए आरोपियों में से कुछ ने आरोप लगाया कि उनसे जबरन कबूलनामा लिया गया था और उन्हें सालों तक जेल में रखा गया। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या इस त्रासदी के पीड़ितों को अंततः न्याय मिल पाएगा या नहीं।