Maharashtra: मुंबई में साल 2009 में एक ट्रेन हादसे में 16 साल के किशोर की जान चली गई थी। इस मामले में करीब 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब परिवार को राहत मिली है। Bombay High Court ने Western Railway को आदेश दिया ह
Maharashtra: मुंबई में साल 2009 में एक ट्रेन हादसे में 16 साल के किशोर की जान चली गई थी। इस मामले में करीब 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब परिवार को राहत मिली है। Bombay High Court ने Western Railway को आदेश दिया है कि वह मृतक के माता-पिता को मुआवजा दे।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुई देरी
20 जून 2009 को Arogyaraj Chettiar नाम का एक किशोर अपने दोस्त के साथ नौकरी की तलाश में गोरेगांव से चर्चगेट जा रहा था। भीड़ की वजह से वह चलती ट्रेन से गिर गया और उसकी मौत हो गई। परिवार ने मुआवजे के लिए दावा किया था, लेकिन 2016 में Railway Claims Tribunal ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद माता-पिता ने 2017 में Bombay High Court का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने मुआवजे के लिए क्या कहा
Justice Jitendra Jain की बेंच ने पाया कि Arogyaraj एक वैध यात्री था क्योंकि उसके पास गोरेगांव से चर्चगेट तक के दो टिकट मिले थे। कोर्ट ने कहा कि Tribunal ने सबूतों को नजरअंदाज कर बड़ी गलती की थी। कोर्ट ने इसे ‘untoward incident’ माना और Western Railway के इस दावे को खारिज कर दिया कि मृतक पटरियों को पार करते समय मरा था।
मुआवजे की राशि और भुगतान का तरीका
| विवरण |
जानकारी |
| कुल अधिकतम मुआवजा |
8 लाख रुपये |
| मूल राशि |
4 लाख रुपये |
| ब्याज दर |
6% वार्षिक (2009 से) |
| भुगतान की समय सीमा |
फैसले के 12 हफ्ते के भीतर |
Frequently Asked Questions (FAQs)
कोर्ट ने इस घटना को ‘untoward incident’ क्यों माना?
Justice Jitendra Jain ने स्पष्ट किया कि भीड़ वाली लोकल ट्रेन से गिरना या प्लेटफॉर्म के किनारे खड़े होने से चोट लगना Railways Act, 1989 के तहत ‘untoward incident’ माना जाता है।
रेलवे ने मुआवजे का विरोध क्यों किया था?
Western Railway का कहना था कि किशोर की मौत पटरियों को पार करते समय (trespassing) हुई थी, जबकि कोर्ट ने पाया कि वह भीड़ के कारण चलती ट्रेन से गिरा था।