Mumbai में Covid, H1N1 और RSV का हमला, मानसून की देरी बनी वजह; BMC ने जारी की एडवाइजरी
Maharashtra: मुंबई में इन दिनों सांस की बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। शहर में Covid-19, H1N1 (स्वाइन फ्लू) और RSV जैसे वायरस के मामले अचानक बढ़ गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल मानसून की देरी औ
Maharashtra: मुंबई में इन दिनों सांस की बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। शहर में Covid-19, H1N1 (स्वाइन फ्लू) और RSV जैसे वायरस के मामले अचानक बढ़ गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल मानसून की देरी और मौसम के उतार-चढ़ाव की वजह से लोग ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं।
मुंबई में इस बार मानसून काफी लेट आया है। IMD ने 23 जून 2026 को मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुंचने की पुष्टि की है। इससे पहले शहर में कभी तेज गर्मी, तो कभी उमस और कभी हल्की बारिश का दौर चला। BMC की एग्जीक्यूटिव हेल्थ ऑफिसर Dr. Daksha Shah ने बताया कि मौसम में हो रहे इन बदलावों के कारण Covid के मामले बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, देरी से हुई बारिश की वजह से हवा में नमी ज्यादा रही और हवा स्थिर रही, जिससे वायरस ज्यादा समय तक टिके रहे और तेजी से फैले।
शहर के बड़े अस्पतालों जैसे Breach Candy, Bombay Hospital, Fortis Mulund और Jupiter Hospital Thane में मरीजों की भीड़ बढ़ी है। Breach Candy Hospital की लैब में रोजाना Covid-19 या H1N1 के 7 से ज्यादा पॉजिटिव केस मिल रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि H1N1 के मामले पिछले एक महीने से थे, लेकिन पिछले एक हफ्ते में Covid-19 की वापसी हुई है। इसके अलावा कई लोगों में पेट का फ्लू (Viral Gastroenteritis) भी देखा जा रहा है।
इन बीमारियों के लक्षण जैसे बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान एक जैसे होते हैं, इसलिए सही पहचान के लिए PCR टेस्ट कराने की सलाह दी गई है। हालांकि मौजूदा Covid स्ट्रेन हल्का है, लेकिन बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और डायबिटीज या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए यह खतरनाक हो सकता है।
BMC और स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों, जैसे लोकल ट्रेन और बाजारों में मास्क पहनने और हाथों की सफाई रखने को कहा गया है। सरकारी अस्पतालों ने चेतावनी दी है कि अगर सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन लेवल कम होने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। डॉक्टरों ने सख्त हिदायत दी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स या पैरासिटामोल जैसी दवाएं न लें, क्योंकि इससे बीमारी छिप सकती है या दवाइयों का असर कम हो सकता है।