Mumbai में स्मार्ट आईडी होने के बाद भी हटाए जा रहे हैं फेरीवाले, BMC की कार्रवाई से बढ़ी परेशानी
Maharashtra: मुंबई के उन अधिकृत फेरीवालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं जिन्हें प्रशासन ने नए क्यूआर कोड वाले स्मार्ट आईडी कार्ड दिए थे। इन कार्ड्स के बावजूद फेरीवालों को हटाए जाने और सामान जब्त होने की खबर
Maharashtra: मुंबई के उन अधिकृत फेरीवालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं जिन्हें प्रशासन ने नए क्यूआर कोड वाले स्मार्ट आईडी कार्ड दिए थे। इन कार्ड्स के बावजूद फेरीवालों को हटाए जाने और सामान जब्त होने की खबरें आ रही हैं, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
यह पूरा मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू हुआ था। कोर्ट ने BMC को 2014 के सर्वे में शामिल 99,435 फेरीवालों को आईडी कार्ड जारी करने का आदेश दिया था, जिसके बाद मई 2026 से ये कार्ड बांटे जाने शुरू हुए। लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। बोरीवली की माया सथेलिया जैसे कई फेरीवालों का कहना है कि जून में आईडी मिलने के बाद भी पुलिस और बीएमसी की कार्रवाई जारी है और इन कार्ड्स की पुलिस की नजरों में कोई कीमत नहीं है।
बीएमसी के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर (स्पेशल) विनायक विस्पुते ने स्पष्ट किया था कि ये क्यूआर कोड वाले कार्ड केवल पहचान के लिए हैं, इन्हें सड़क पर बेचने का लाइसेंस नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर फेरीवाले ट्रैफिक या पैदल चलने वालों के रास्ते में बाधा डालते हैं, तो उन्हें हटाया जा सकता है। फिलहाल केवल 10,350 पुराने लाइसेंस वाले फेरीवालों को ही पूरी तरह सुरक्षा मिली हुई है।
इस समस्या की मुख्य वजह टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) का गठन न होना बताया जा रहा है। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत इस कमेटी का बनना जरूरी था ताकि फेरीवालों के लिए अलग जोन तय किए जा सकें। 5 अगस्त 2026 को विनायक विस्पुते ने कहा कि सरकार की मंजूरी मिलते ही एक हफ्ते के भीतर इस कमेटी का गठन कर लिया जाएगा। तब तक फेरीवालों को जोन न मिलने के कारण वे कार्रवाई के घेरे में आ रहे हैं।