Maharashtra: मुंबई के CST इलाके के पास स्थित सरकारी St George’s Hospital में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है। करीब नौ महीने पहले एक खास Psychiatry Ward (मनोचिकित्सा वार्ड) शुरू किया गया था, लेकिन स्टाफ की कमी की
Maharashtra: मुंबई के CST इलाके के पास स्थित सरकारी St George’s Hospital में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है। करीब नौ महीने पहले एक खास Psychiatry Ward (मनोचिकित्सा वार्ड) शुरू किया गया था, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से महिला मरीज वहां भर्ती नहीं हो पा रही हैं। अस्पताल में महिला नाइट अटेंडेंट न होने के कारण महिलाओं के लिए बना वार्ड अभी भी लॉक है।
महिला वार्ड बंद होने और OPD की क्या स्थिति है?
अस्पताल में पुरुषों के लिए 20 बेड वाला वार्ड सितंबर 2025 से चल रहा है, जहां मुख्य रूप से नशे की लत से जूझ रहे मरीजों को रखा जाता है। वहीं महिलाओं के लिए बना 10 बेड का वार्ड सिर्फ इसलिए बंद है क्योंकि वहां रात में ड्यूटी करने के लिए महिला आया उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, मानसिक रोगियों की OPD फिलहाल TB (टीबी) विभाग के साथ साझा की जा रही है, जिसे डॉक्टर नैतिक और चिकित्सकीय रूप से गलत मान रहे हैं।
इलाज के उपकरणों और स्टाफ पर क्या बोले अधिकारी?
डॉ. यूसुफ मटचेस्वला ने बताया कि बिना महिला अटेंडेंट के महिलाओं को सुरक्षित तरीके से भर्ती करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने यह बात अप्रैल में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों तक पहुंचाई थी। साथ ही, एक ECT मशीन भी दान की गई थी, लेकिन एनेस्थेटिस्ट (Anesthetist) की नियुक्ति न होने की वजह से वह मशीन बेकार पड़ी है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विनय सवरेकर ने कहा कि क्लास 4 स्टाफ की भर्ती हो चुकी है और वे एक महीने में जॉइन कर लेंगे, जिसके बाद महिला आया की समस्या दूर हो जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
St George’s Hospital में महिला मरीज भर्ती क्यों नहीं हो पा रही हैं?
अस्पताल में महिला नाइट अटेंडेंट की नियुक्ति नहीं हुई है, जो महिला मरीजों को भर्ती करने के लिए एक अनिवार्य जरूरत है।
Psychiatry OPD को लेकर क्या समस्या है?
मानसिक रोगों की OPD फिलहाल चेस्ट/टीबी विभाग के साथ साझा की जा रही है, जिसे मरीजों की संवेदनशीलता को देखते हुए गलत माना जा रहा है।