Maharashtra: अपनी बेटी Sheena Bora की हत्या के मामले में आरोपी Indrani Mukerjea को एक और कानूनी झटका लगा है। मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट ने विदेश यात्रा की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया है। Indrani ने बैंक अकाउंट एक्टिव करने
Maharashtra: अपनी बेटी Sheena Bora की हत्या के मामले में आरोपी Indrani Mukerjea को एक और कानूनी झटका लगा है। मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट ने विदेश यात्रा की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया है। Indrani ने बैंक अकाउंट एक्टिव करने और अपनी वसीयत (will) बदलने के लिए UK और Spain जाने की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर नहीं किया।
Indrani Mukerjea ने विदेश जाने के लिए क्या वजह बताई थी?
Indrani Mukerjea ने कोर्ट को बताया कि उन्हें UK और Spain जाना जरूरी है। उनका कहना था कि वहां उनके कुछ बैंक अकाउंट हैं जिन्हें एक्टिव करना है और साथ ही उन्हें अपनी वसीयत में कुछ बदलाव करने हैं। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और उनकी याचिका को नामंजूर कर दिया।
Supreme Court और CBI कोर्ट का क्या रुख रहा?
इससे पहले 24 अप्रैल 2026 को Supreme Court ने भी Indrani की सीधी याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया था। जस्टिस M.M. Sundresh और N. Kotiswar Singh ने साफ किया कि विदेश यात्रा की अनुमति के लिए उन्हें उसी ट्रायल कोर्ट में जाना होगा जहां उनका केस चल रहा है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि इस अर्जी का निपटारा चार हफ्ते के भीतर किया जाए।
पहले भी कई बार खारिज हुई विदेश यात्रा की मांग
यह पहली बार नहीं है जब Indrani की विदेश यात्रा रोकी गई हो। फरवरी 2025 में Supreme Court ने यह कहते हुए अर्जी खारिज की थी कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह वापस आएंगी। हालांकि, जुलाई 2024 में एक बार उन्हें 10 दिन के लिए Spain और UK जाने की अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में CBI की अपील पर Bombay High Court ने उस आदेश को रद्द कर दिया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Indrani Mukerjea विदेश क्यों जाना चाहती थीं?
Indrani Mukerjea ने कोर्ट में आवेदन किया था कि उन्हें UK और Spain में अपने बैंक अकाउंट्स को एक्टिवेट करना है और अपनी वसीयत (will) में बदलाव करने हैं।
Supreme Court ने इस मामले में क्या निर्देश दिए थे?
Supreme Court ने 24 अप्रैल 2026 को कहा कि विदेश यात्रा की अनुमति के लिए Indrani को ट्रायल कोर्ट (Special CBI Court) में आवेदन करना चाहिए और कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इसे 4 हफ्ते में सुलझाने को कहा था।