Mumbai में पुरानी सोसायटियों का कायाकल्प, 2026 की पहली तिमाही में हुए 70 नए पुनर्विकास समझौते

Maharashtra: मुंबई में पुरानी और जर्जर इमारतों की जगह अब बड़ी और ऊंची इमारतों का दौर शुरू हो गया है। साल 2026 की पहली तिमाही (Q1) में शहर की 70 हाउसिंग सोसायटियों ने पुनर्विकास (Redevelopment) के लिए समझौते किए हैं। इससे

Maharashtra: मुंबई में पुरानी और जर्जर इमारतों की जगह अब बड़ी और ऊंची इमारतों का दौर शुरू हो गया है। साल 2026 की पहली तिमाही (Q1) में शहर की 70 हाउसिंग सोसायटियों ने पुनर्विकास (Redevelopment) के लिए समझौते किए हैं। इससे शहर के रिहायशी इलाकों की शक्ल बदल रही है और अब छोटे प्लॉट के बजाय बड़े क्लस्टर आधारित प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया जा रहा है।

Knight Frank India की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से अब तक मुंबई में कुल 1,094 पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो करीब 432 एकड़ जमीन में फैले हुए हैं। इन प्रोजेक्ट्स से 2031 तक शहर में लगभग 59,000 नए घर जुड़ेंगे। इन घरों की बाजार कीमत करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जिससे सरकार को स्टैम्प ड्यूटी के रूप में 9,115 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई होगी।

इस बार प्रोजेक्ट्स का दायरा बढ़ा है। पहले जहां औसत प्लॉट साइज 1,850 वर्ग मीटर था, वहीं 2026 में यह बढ़कर लगभग 3,000 वर्ग मीटर हो गया है। पहली तिमाही के आधे से ज्यादा प्रोजेक्ट्स 10,000 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर आधारित हैं। इसका मुख्य कारण DCPR 2034 में बदलाव और राज्य की सेल्फ-रिडेवलपमेंट पॉलिसी है।

मुख्य जानकारी विवरण
कुल प्रोजेक्ट्स (2020 से) 1,094
कुल जमीन 432 एकड़
सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स वाला इलाका Western Suburbs (773 प्रोजेक्ट्स)
सबसे आगे रहने वाला क्षेत्र Borivali (220 प्रोजेक्ट्स)
न्यूनतम सहमति (Consent) 51% सदस्य (पहले 70% था)
बैंक गारंटी नियम प्रोजेक्ट लागत का 20% अनिवार्य

नियमों में बदलाव से अब सोसायटियों के लिए काम आसान हुआ है। पहले पुनर्विकास के लिए 70% सदस्यों की सहमति चाहिए थी, लेकिन अब इसे घटाकर 51% कर दिया गया है। साथ ही, पारदर्शिता के लिए बिल्डर को प्रोजेक्ट लागत का 20% बैंक गारंटी के रूप में देना होगा और RERA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। सभी महत्वपूर्ण मीटिंग्स की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करनी होगी।

इस बदलाव का असर किराए के बाजार पर भी पड़ा है, क्योंकि पुनर्विकास के कारण विस्थापित हुए लोग मुंबई की रेंटल डिमांड में 8% का योगदान दे रहे हैं। बड़े खिलाड़ियों की बात करें तो Reliance Industries ने अंधेरी के जुहू लेन-गिल्बर्ट हिल स्लम क्लस्टर (101 एकड़) का जिम्मा लिया है, वहीं Adani Group गोरेगांव के मोतीलाल नगर प्रोजेक्ट (143 एकड़) पर काम कर रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बजट 2026-27 में ‘नो न्यू स्लम फ्रेमवर्क’ की बात की है, जिसके तहत 20 लाख स्लम बस्तियों का पुनर्विकास कर 10 लाख किफायती घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।