Maharashtra: मुंबई में गंभीर रूप से जले हुए मरीजों के लिए स्किन ग्राफ्ट की भारी किल्लत हो गई है। National Burns Centre के मुताबिक, शहर में हर महीने करीब 150 स्किन ग्राफ्ट की जरूरत होती है, लेकिन स्किन बैंकों को सिर्फ 25%
Maharashtra: मुंबई में गंभीर रूप से जले हुए मरीजों के लिए स्किन ग्राफ्ट की भारी किल्लत हो गई है। National Burns Centre के मुताबिक, शहर में हर महीने करीब 150 स्किन ग्राफ्ट की जरूरत होती है, लेकिन स्किन बैंकों को सिर्फ 25% यानी करीब 30 डोनेशन ही मिल पाते हैं। इस कमी की वजह से लगभग 120 मरीज वेटिंग लिस्ट में फंसे हुए हैं।
स्किन डोनेशन की क्या है स्थिति और नियम
भारत में स्किन बैंकिंग की शुरुआत 2002 में हुई थी। फिलहाल पूरे देश में 35 स्किन बैंक हैं, जिनमें से 4 मुंबई और नवी मुंबई में हैं। नियमों के मुताबिक, मौत के 6 घंटे के भीतर स्किन डोनेट की जा सकती है। अगर शरीर को अच्छे से रेफ्रिजरेशन में रखा गया है, तो यह समय 12 घंटे तक हो सकता है। डोनेशन के लिए व्यक्ति का स्थानीय स्किन बैंक में रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
मरीजों पर क्या पड़ रहा है असर
नेशनल बर्न सेंटर के डायरेक्टर डॉ. सुनील केसवानी ने बताया कि लोगों में जागरूकता की बहुत कमी है। केवल 10 में से एक व्यक्ति को ही स्किन डोनेशन की प्रक्रिया के बारे में पता है। देश में हर साल करीब 70 लाख लोग जलने की वजह से चोटिल होते हैं और 1.4 लाख मौतें होती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सही समय पर स्किन ग्राफ्ट मिल जाए, तो इनमें से 50% जानें बचाई जा सकती हैं।
कौन हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
डेटा के अनुसार, जलने वाले मरीजों में 70% लोग 15 से 35 साल की उम्र के होते हैं। इनमें 80% महिलाएं और बच्चे होते हैं, जिनमें ज्यादातर हादसे रसोई घर में होते हैं। नवंबर 2025 में AIIMS दिल्ली में एक मीटिंग हुई थी, जिसमें देशभर के 22 स्किन बैंकों ने इस समस्या को सुलझाने और एक नेशनल रजिस्ट्री बनाने पर चर्चा की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
स्किन डोनेशन के लिए समय सीमा क्या है
स्किन डोनेशन मौत के 6 घंटे के भीतर होना चाहिए, लेकिन अगर शरीर को रेफ्रिजरेट किया गया है तो 12 घंटे तक डोनेशन संभव है।
मुंबई में स्किन ग्राफ्ट की कितनी कमी है
मुंबई में हर महीने 150 ग्राफ्ट की जरूरत होती है, लेकिन केवल 30 (25%) ही मिल पाते हैं, जिससे 120 मरीज इंतजार करते हैं।