Maharashtra: मुंबई के स्कूलों ने बस ऑपरेटरों द्वारा दिए गए हाइब्रिड एजुकेशन के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। School Bus Owners Association (SBOA) ने डीजल की बढ़ती कीमतों और खर्चों को देखते हुए हफ्ते में तीन दिन
Maharashtra: मुंबई के स्कूलों ने बस ऑपरेटरों द्वारा दिए गए हाइब्रिड एजुकेशन के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। School Bus Owners Association (SBOA) ने डीजल की बढ़ती कीमतों और खर्चों को देखते हुए हफ्ते में तीन दिन फिजिकल और दो दिन ऑनलाइन क्लास चलाने का सुझाव दिया था। हालांकि, स्कूल प्रिंसिपल्स का मानना है कि बच्चों की पढ़ाई और उनके विकास के लिए नियमित रूप से स्कूल आना जरूरी है।
बस ऑपरेटरों ने हाइब्रिड मॉडल का सुझाव क्यों दिया था?
SBOA महाराष्ट्र के अध्यक्ष अनिल गर्ग ने बताया कि डीजल की कीमतों में पिछले 11 दिनों में करीब 8 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। बस चलाने के कुल खर्च में 65% हिस्सा सिर्फ ईंधन का होता है। इसके अलावा इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और स्टाफ की सैलरी भी बढ़ रही है। ऑपरेटरों का कहना था कि हाइब्रिड मॉडल अपनाने से ईंधन की खपत कम होगी और अभिभावकों पर फीस बढ़ाने का बोझ नहीं पड़ेगा।
स्कूलों ने इस प्रस्ताव को क्यों नकारा?
मुंबई के स्कूल प्रिंसिपल्स और एडमिनिस्ट्रेटर ने एक सुर में इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद स्कूल अब जाकर पटरी पर लौटे हैं, ऐसे में दोबारा ऑनलाइन पढ़ाई की तरफ जाना गलत होगा। शिक्षकों का मानना है कि क्लासरूम में पढ़ाई होने से ही अनुशासन, आपसी बातचीत और को-करिकुलर एक्टिविटीज बेहतर होती हैं, जो ऑनलाइन पढ़ाई में संभव नहीं है।
अब छात्रों और अभिभावकों पर क्या होगा असर?
हाइब्रिड मॉडल खारिज होने के बाद अब SBOA ने स्कूल बस फीस में 15% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नई फीस जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। कुछ पैरेंट्स एसोसिएशन ने हाइब्रिड मॉडल का समर्थन किया था ताकि फीस न बढ़े, लेकिन अब उन्हें ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। वहीं SBOA ने राज्य सरकार से इस संकट से निपटने के लिए सब्सिडी या राहत देने की अपील की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बस ऑपरेटरों ने फीस में कितनी बढ़ोतरी की है?
SBOA ने डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण स्कूल बस फीस में 15% की बढ़ोतरी की है, जो जून से लागू होगी।
हाइब्रिड लर्निंग मॉडल में क्या प्रस्ताव था?
प्रस्ताव के अनुसार छात्रों के लिए हफ्ते में तीन दिन स्कूल जाना होता और बाकी दो दिन की पढ़ाई ऑनलाइन तरीके से होती।