Mumbai रियल एस्टेट में बड़े कॉर्पोरेट घरानों की एंट्री, Reliance और Adani अब करेंगे झुग्गियों का पुनर्विकास

Maharashtra: मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक शहर में छोटे और मध्यम स्तर के बिल्डरों का दबदबा था, लेकिन अब Reliance और Adani जैसे बड़े कॉर्पोरेट घराने इस मैदान में उतर आए हैं। ये बड

Maharashtra: मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक शहर में छोटे और मध्यम स्तर के बिल्डरों का दबदबा था, लेकिन अब Reliance और Adani जैसे बड़े कॉर्पोरेट घराने इस मैदान में उतर आए हैं। ये बड़े ग्रुप अब झुग्गी-बस्तियों के पुनर्विकास (Redevelopment) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में ले रहे हैं, जिससे शहर के रिहायशी इलाकों की सूरत बदलने वाली है।

हालिया जानकारी के मुताबिक, मुकेश अंबानी के Reliance 4IR Realty ने पश्चिमी मुंबई के जुहू गली स्लम क्लस्टर प्रोजेक्ट की बोली जीती है। यह प्रोजेक्ट करीब 101.4 एकड़ में फैला है और इसमें 28,000 से ज्यादा रिहैबिलिटेशन घर बनाए जाएंगे। इससे पहले Adani Group धारावी पुनर्विकास परियोजना पर काम कर रहा है। इनके अलावा JSW Group और Shapoorji Pallonji Group भी बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले रहे हैं।

इस बदलाव की बड़ी वजह महाराष्ट्र सरकार की नई नीतियां हैं। नवंबर 2025 में लागू हुए नए स्लम क्लस्टर पुनर्विकास फ्रेमवर्क के तहत 50 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें निवासियों की सहमति की अनिवार्यता को कम किया गया है और ज्यादा ऊंचाई तक बिल्डिंग बनाने की अनुमति दी गई है। साथ ही, 5 जून 2026 को जारी सरकारी आदेश के बाद सरकारी जमीन (लीजहोल्ड/नजूल) के पुनर्विकास के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है, जिससे अब जिला कलेक्टर और डिविजनल कमिश्नर के पास मंजूरी देने के अधिकार हैं।

मुंबई के हाउसिंग मार्केट पर पड़ने वाले असर का विवरण नीचे दिया गया है:

विवरण जानकारी
प्रोजेक्ट का प्रकार क्लस्टर आधारित पुनर्विकास
अनुमानित नए घर (2031 तक) करीब 59,000 घर
अनुमानित बाजार मूल्य 1.5 लाख करोड़ रुपये
प्रमुख कंपनियां Reliance, Adani, JSW, Shapoorji Pallonji
नियामक संस्थाएं SRA और MahaRERA
नया नियम 50 एकड़ से बड़े पार्सल के लिए आसान नियम

आम खरीदारों के लिए भी राहत की खबर है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 जून 2026 को फैसला सुनाया कि अगर घर मिलने में देरी होती है, तो खरीदार RERA के तहत हर महीने का ब्याज पाने के हकदार हैं, भले ही उन्होंने रिफंड के बजाय कब्जा लेना चुना हो। SRA के सीईओ महिंद्रा कल्यानकर के अनुसार, बड़े कॉर्पोरेट घरानों के आने से प्रोजेक्ट्स में पैसा बढ़ेगा और काम तेजी से पूरा होगा, जिससे आम लोगों को समय पर घर मिल सकेंगे।