Mumbai में बाढ़ से बचने के लिए Rainwater Harvesting पर जोर, सरकार ने बनाया 13,000 करोड़ का ‘Sponge City’ प्लान
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में जुलाई के पहले हफ्ते में इतनी बारिश हुई कि उससे शहर की 100 दिनों की पानी की जरूरत पूरी हो सकती थी। लेकिन विडंबना यह है कि एक तरफ शहर में पानी की कटौती चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर पानी
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में जुलाई के पहले हफ्ते में इतनी बारिश हुई कि उससे शहर की 100 दिनों की पानी की जरूरत पूरी हो सकती थी। लेकिन विडंबना यह है कि एक तरफ शहर में पानी की कटौती चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर पानी भरने से लोग परेशान हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हम बारिश के पानी को सहेजने की आदत डालें, तो बाढ़ की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई के पहले हफ्ते में मुंबई में जितनी बारिश हुई, उसका करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सड़कों पर बह गया, जिससे शहर में जलभराव हुआ। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने 13,000 करोड़ रुपये का ‘स्पंज सिटी’ प्लान पेश किया है। इस योजना के तहत बायो-रिटेंशन पार्क, खास तरह के टैंक और ऐसी सड़कें बनाई जाएंगी जो पानी को सोख सकें।
BMC ने साल 2002 से ही नई हाउसिंग सोसायटियों के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग (RWH) अनिवार्य कर दिया था। बाद में नियमों में बदलाव कर इसे 300 और फिर 500 वर्ग मीटर से ज्यादा जगह वाली इमारतों के लिए जरूरी किया गया। महाराष्ट्र राज्य जल नीति 2019 के तहत भी शहरी इलाकों में बारिश के पानी का संरक्षण अनिवार्य है। जो सोसायटियां इसे सही तरीके से लागू करती हैं, BMC उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स में 5 प्रतिशत की छूट भी देती है।
Centre for Environmental Research and Education (CERE) की संस्थापक रश्नेह पारदीवाला ने बताया कि पानी को जमीन के अंदर उतारना और बाढ़ रोकना एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने बताया कि जोगेश्वरी के मैल्कम बाग में बने सिस्टम से हर साल करीब 1.85 लाख लीटर पानी बचाया जा रहा है। वहीं, Pani Haq Samiti और Watchdog Foundation जैसे संगठनों ने मांग की है कि पुराने कुओं और तालाबों की सफाई की जाए ताकि जमीन में पानी सोखने की क्षमता बढ़ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई की पानी की सुरक्षा सिर्फ मानसून पर निर्भर नहीं रह सकती। इसके लिए रिसाइकिल पानी का इस्तेमाल और जमीन के नीचे के जल स्तर को बढ़ाना बहुत जरूरी है। BMC का स्वास्थ्य विभाग भी इन सिस्टम्स की निगरानी करता है ताकि वहां मच्छरों का प्रजनन न हो और बीमारियों का खतरा कम रहे।