Maharashtra: मुंबई सेंट्रल डिवीजन के वेस्टर्न रेलवे (WR) और सेंट्रल रेलवे (CR) ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर प्लास्टिक के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस मुहिम का मकसद रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को सिंगल-यू
Maharashtra: मुंबई सेंट्रल डिवीजन के वेस्टर्न रेलवे (WR) और सेंट्रल रेलवे (CR) ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर प्लास्टिक के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस मुहिम का मकसद रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से मुक्त बनाना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। यह पूरा अभियान केंद्र सरकार के मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) से जुड़ा हुआ है।
रेलवे ने प्लास्टिक रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
वेस्टर्न और सेंट्रल रेलवे ने मिलकर स्टेशनों पर कई कड़े कदम उठाए हैं। वेंडरों के स्टालों पर विशेष जांच की गई ताकि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल न हो। इसके अलावा, यात्रियों को प्लास्टिक की बोतलों के बजाय पानी दोबारा भरने के लिए प्रेरित करने हेतु 140 वाटर रिफिल पॉइंट की जांच की गई। प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से ठिकाने लगाने के लिए स्टेशनों पर प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीन (PBCM) लगाई जा रही हैं, जिनमें से एक सोलापुर कोचिंग डिपो में शुरू की गई है।
अभियान की खास बातें और समय सीमा
| विवरण |
जानकारी |
| WR अभियान की तारीख |
23 से 26 मई |
| CR अभियान की तारीख |
15 मई से 5 जून |
| शामिल डिवीजन (CR) |
मुंबई, भुसावल, नागपुर, पुणे और सोलापुर |
| मुख्य गतिविधियां |
नुक्कड़ नाटक, ड्राइंग प्रतियोगिता और सफाई अभियान |
| जागरूकता माध्यम |
पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और NGO की मदद |
आम जनता और कर्मचारियों को कैसे किया गया जागरूक?
रेलवे ने लोगों तक अपनी बात पहुँचाने के लिए नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सहारा लिया। स्कूल के बच्चों के लिए पुणे डिवीजन में ड्राइंग कॉम्पिटिशन कराए गए और मुंबई डिवीजन में जागरूकता सत्र आयोजित हुए। माटुंगा में एक खास सेमिनार किया गया जहाँ कर्मचारियों को सिखाया गया कि दूध और तेल के पाउच को आधा काटकर कैसे अलग करें, ताकि माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेलवे का यह प्लास्टिक विरोधी अभियान कब तक चलेगा?
भारतीय रेलवे का यह राष्ट्रव्यापी अभियान 15 मई से शुरू होकर 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) तक चलेगा।
प्लास्टिक कचरे के निपटान के लिए रेलवे क्या कर रहा है?
रेलवे स्टेशनों पर प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीन (PBCM) लगाई जा रही हैं ताकि बोतलों को रिसाइकिल किया जा सके, जैसे सोलापुर कोचिंग डिपो में नई मशीन लगाई गई है।