Maharashtra: मुंबई के एक प्रोफेशनल ने कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ऑफिस में ज्यादा मेहनत करने वाले कर्मचारियों को इनाम के बजाय और ज्यादा काम थमा दिया जाता है। इस वजह से अब
Maharashtra: मुंबई के एक प्रोफेशनल ने कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ऑफिस में ज्यादा मेहनत करने वाले कर्मचारियों को इनाम के बजाय और ज्यादा काम थमा दिया जाता है। इस वजह से अब नई पीढ़ी यानी Gen Z के युवा अपनी तय भूमिका से ज्यादा काम करने से बच रहे हैं ताकि वे मानसिक तनाव और बर्नआउट से बच सकें।
क्या है ‘हार्ड वर्क ट्रैप’ और यह कैसे काम करता है
मुंबई के इस व्यक्ति ने एक हाई-परफॉर्मिंग डिजाइनर का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब कोई कर्मचारी अपना काम बहुत कुशलता से और जल्दी खत्म कर लेता है, तो कंपनी उसे पहचान देने के बजाय दूसरों का काम भी सौंप देती है। इसे ही ‘हार्ड वर्क ट्रैप’ कहा जा रहा है, जहाँ आपकी काबिलियत ही आपके लिए सजा बन जाती है। इस वजह से युवा कर्मचारी अब सिर्फ उतना ही काम कर रहे हैं जितना उनसे उम्मीद की जाती है।
Gen Z युवाओं में क्यों बढ़ रहा है तनाव और ‘Quiet Quitting’
रिसर्च के मुताबिक, भारत में Gen Z कर्मचारी वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर काफी चिंतित हैं। कई रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- Naukri की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 34% युवा वर्क-लाइफ बैलेंस न होने को मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी समस्या मानते हैं।
- Indeed की 2025 रिपोर्ट बताती है कि 58% Gen Z कर्मचारियों ने ‘Quiet Quitting’ (सिर्फ जरूरी काम करना) का रास्ता अपनाया है।
- करीब 83% फ्रंटलाइन कर्मचारी बर्नआउट का शिकार हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
- 57% युवा अब प्रमोशन या सैलरी से ज्यादा नई स्किल सीखने को करियर ग्रोथ मानते हैं।
कंपनियों के लिए क्या है सुझाव और नियम
इस मामले में प्रोफेशनल ने कंपनियों से अपील की है कि वे अपने सबसे प्रोडक्टिव कर्मचारियों के साथ व्यवहार बदलें और उन्हें सही मुआवजा दें। वहीं, भारत सरकार ने कॉर्पोरेट कानूनों में बदलाव के लिए Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026 पेश किया है, जिसका मकसद छोटे कॉर्पोरेट अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन्हें सिविल पेनल्टी में बदलना है ताकि बिजनेस करना आसान हो सके।