Mumbai के Powai Lake को 1 अक्टूबर तक सीवेज मुक्त करेगी BMC, 1.85 करोड़ के कंसल्टेंट प्लान पर उठे सवाल
Maharashtra/Mumbai: मुंबई की मशहूर Powai Lake को अब गंदगी और सीवेज से बचाने की तैयारी शुरू हो गई है। BMC ने दावा किया है कि 1 अक्टूबर 2026 तक इस झील को पूरी तरह से सीवेज मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रशासन 18 अलग-अलग र
Maharashtra/Mumbai: मुंबई की मशहूर Powai Lake को अब गंदगी और सीवेज से बचाने की तैयारी शुरू हो गई है। BMC ने दावा किया है कि 1 अक्टूबर 2026 तक इस झील को पूरी तरह से सीवेज मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रशासन 18 अलग-अलग रास्तों (outfalls) को बंद कर रहा है, जहां से गंदा पानी झील में गिरता था।
BMC के एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर Abhijit Bangar ने बताया कि करीब 18 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) सीवेज को झील में जाने से रोका जा रहा है। इन रास्तों की जांच IIT-Bombay के साथ मिलकर की गई है। अधिकारियों का कहना है कि सीवेज डायवर्जन का काम 30 जून 2026 तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद अक्टूबर के सूखे मौसम में पानी की क्वालिटी में सुधार दिखना शुरू होगा।
इस प्रोजेक्ट के बीच एक विवाद AECOM Asia Company Ltd की नियुक्ति को लेकर खड़ा हुआ है। BMC इस कंपनी को झील के पुनर्विकास (redevelopment) के लिए कंसल्टेंट बनाना चाहती है, जिसके लिए 1.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस फैसले पर स्टैंडिंग कमेटी में काफी बहस हुई है। कांग्रेस पार्षद Ashraf Azmi ने सवाल उठाया कि क्या इस कंपनी के पास झील को सुधारने का अनुभव है और जनता के पैसे का इस्तेमाल सही हो रहा है। वहीं NCP की Saeeda Khan ने कंपनी की साख पर शक जताया और सुझाव दिया कि झील को मनोरंजन के लिए विकसित किया जाए ताकि कमाई हो सके।
शिवसेना (UBT) के पार्षद Yashodhar Phanse ने इस बात पर आपत्ति जताई कि AECOM की नियुक्ति के लिए जरूरी टेंडर प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। इन सवालों के जवाब में Abhijit Bangar ने कहा कि AECOM ने मुंबई कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया है, इसलिए उन्हें चुना गया। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस काम के लिए IIT-Bombay और Bombay Natural History Society (BNHS) तकनीकी मदद देंगे और इसके लिए Coastal Regulation Zone (CRZ) की अनुमति की जरूरत नहीं है।
बता दें कि आदि शंकराचार्य मार्ग के किनारे बना 1.8 किलोमीटर का प्रोमेनेड 2008 में बनाया गया था, लेकिन तब से इसके रखरखाव और सुंदरता पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। अब इस नए प्लान के जरिए इसे फिर से संवारने की कोशिश की जाएगी।