Mumbai के Powai में फुटपाथ बना निजी प्रॉपर्टी, लोगों ने लगाया आरोप; BMC ने शुरू किया ‘Pedestrian First’ अभियान
Maharashtra/Mumbai: मुंबई के पवई इलाके में रहने वाले लोगों ने एक गंभीर समस्या की शिकायत की है। हिरानंदानी गार्डन्स के निवासियों का कहना है कि शहर के सार्वजनिक फुटपाथों को नए रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए घेर लिया गया ह
Maharashtra/Mumbai: मुंबई के पवई इलाके में रहने वाले लोगों ने एक गंभीर समस्या की शिकायत की है। हिरानंदानी गार्डन्स के निवासियों का कहना है कि शहर के सार्वजनिक फुटपाथों को नए रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए घेर लिया गया है और उन्हें निजी संपत्ति में बदल दिया गया है। लोगों का आरोप है कि जो रास्ते सालों से सबके इस्तेमाल के लिए थे, अब वहां बैरिकेड्स लगाकर आम जनता का रास्ता रोका जा रहा है।
पवई एक्शन फोरम ने 7 अगस्त 2026 को नगर निगम अधिकारियों को एक ईमेल भेजा। इसमें बताया गया कि सेंट्रल एवेन्यू पर सिटीपार्क के पास Brookfield (अब BGRE) नाम की कंपनी ने फुटपाथों पर कब्जा कर लिया है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि एक मुख्य कमर्शियल सड़क पर बिना फुटपाथ के मंजूरी कैसे दी गई। वहीं, Brookfield (BGRE) का कहना है कि वह हिस्सा उनकी अपनी प्रॉपर्टी है और सारा काम कानूनी मंजूरी के साथ हो रहा है।
इस बीच BMC ने 3 से 9 अगस्त 2026 के बीच ‘Pedestrian First’ अभियान चलाया है। इस मुहिम के तहत मुंबई के 320 किलोमीटर फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने की योजना है। BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने निर्देश दिए हैं कि वार्ड ऑफिसर रोजाना जांच करें और डिप्टी कमिश्नर हर हफ्ते इसकी समीक्षा करें। नए नियमों के मुताबिक, जिन प्रॉपर्टी मालिकों ने अवैध तरीके से फुटपाथ बदला है, उन्हें 21 दिनों के भीतर इसे ठीक करना होगा, वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अपनी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने BMC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ सड़कों को निजी संपत्ति बताना अपनी जिम्मेदारी से भागना है। कोर्ट ने कमिश्नर भूषण गग्रानी को अतिक्रमण हटाने का प्लान पेश करने के निर्देश दिए थे। पर्यावरणविद् देबी गोएनका ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है और हर सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ होना जरूरी है।
2 अगस्त 2026 को पवई और चांदिवली के लोगों ने मिलकर विरोध प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर सार्वजनिक सुविधाओं और फुटपाथों का इस्तेमाल FSI और TDR बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी हो रही है।