Mumbai में CJP प्रदर्शनकारियों की बढ़ी मुश्किलें, केस वापस लेने के आश्वासन के बाद भी पुलिस भेज रही नोटिस

Maharashtra: मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले छात्र और युवा इस समय बड़ी उलझन में हैं। केंद्र सरकार की तरफ से केस वापस लेने का भरोसा दिया गया था, लेकिन मुंबई पुलिस अब भी प्रदर्शनकारिय

Maharashtra: मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले छात्र और युवा इस समय बड़ी उलझन में हैं। केंद्र सरकार की तरफ से केस वापस लेने का भरोसा दिया गया था, लेकिन मुंबई पुलिस अब भी प्रदर्शनकारियों को समन भेज रही है और उनके बयान दर्ज कर रही है। इससे उन छात्रों में डर और अनिश्चितता का माहौल है जिन्हें लगा था कि उन्हें कानूनी कार्रवाई से राहत मिल जाएगी।

पुलिस का कहना है कि जांच को बीच में नहीं रोका जा सकता। अधिकारियों के मुताबिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े मामलों में केस तभी वापस लिए जा सकते हैं जब चार्जशीट फाइल हो जाए। पुलिस ने साफ किया कि उन्हें फिलहाल जांच रोकने का कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिला है।

इस पूरे मामले का घटनाक्रम काफी तनावपूर्ण रहा है। 18 जुलाई से 22 जुलाई 2026 के बीच मुंबई पुलिस ने CJP के आंदोलन से जुड़ी 13 FIR दर्ज की थीं, जिनमें करीब 400 लोग नामजद थे। इसके बाद 23 जुलाई को करीब 900 लोगों पर केस दर्ज हुए और 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कई लोगों को WhatsApp के जरिए नोटिस भेजे और उनके घरों पर भी विजिट किया। साथ ही, शहर में 23 जुलाई से 6 अगस्त तक सभाओं पर रोक लगाने के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई थी।

21 जुलाई को शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के मामले में 24 जुलाई को एक FIR मिली, जिसमें आदित्य तोमर समेत 90 आरोपी शामिल थे। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने 21 जुलाई 2026 को एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया था। इसमें कहा गया था कि राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के उन आपराधिक मामलों को वापस लिया जा सकता है जिनकी चार्जशीट 31 जुलाई 2026 तक फाइल हो जाती है।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका और सौरव दास ने केंद्र के मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के दौरान केस वापस लेने का आश्वासन पाया था। CJP ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर 28 जुलाई तक सभी FIR वापस नहीं ली गईं और लिखित समझौता नहीं मिला, तो वे फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। हालांकि, 28 जुलाई को भी मुंबई पुलिस ने अपनी जांच जारी रखी, जिससे प्रदर्शनकारियों और उनके वकील विक्रांत खारे की चिंता बढ़ गई है।