Mumbai में CJP प्रोटेस्ट को रोकने के लिए पुलिस का सख्त पहरा, युवाओं से मांगी Live Location

Maharashtra: मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए मुंबई पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस ने प्रदर्शनों में शामिल होने वाले युवाओं को रोकने के लिए उन्हें फोन कॉल किए, उनके घर जाकर चेत

Maharashtra: मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए मुंबई पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस ने प्रदर्शनों में शामिल होने वाले युवाओं को रोकने के लिए उन्हें फोन कॉल किए, उनके घर जाकर चेतावनी दी और कुछ से तो अपनी Live Location शेयर करने तक को कहा। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन लोगों के खिलाफ की गई जिनके नाम पर पहले से FIR दर्ज है।

मुंबई पुलिस ने 21 जुलाई 2026 को निषेधाज्ञा (Prohibitory orders) जारी की थी, जो 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी। इस आदेश के तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और जुलूस में पटाखे फोड़ने पर रोक लगा दी गई है। पुलिस का कहना है कि इन प्रदर्शनों के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए कानूनी कार्रवाई की गई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस कार्रवाई का मकसद उन युवाओं को बचाना है जो FIR के गंभीर परिणामों को नहीं समझते। पुलिस उन WhatsApp ग्रुप्स की भी जांच कर रही है जिनके जरिए प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य और पासपोर्ट वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाएं खराब न हों। वहीं, शिवाजी पार्क स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर प्रमोद पवार ने कहा कि गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने के कारण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के इन तरीकों को डराने वाला बताया है। एक प्रदर्शनकारी ने WhatsApp स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें वर्सोवा पुलिस स्टेशन के एक सीनियर इंस्पेक्टर ने उन्हें घर पर रहने और सबूत के तौर पर Live Location भेजने को कहा था। इसके अलावा, कई युवाओं ने शिकायत की कि हिरासत के दौरान उनके फोन लिए गए और वापस मिलने पर उनमें निगरानी के संकेत दिखे।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच दिनों में मुंबई पुलिस ने करीब 400 लोगों के खिलाफ 13 FIR दर्ज की हैं। इनमें गैरकानूनी सभा और सरकारी आदेशों की अवहेलना जैसे आरोप लगाए गए हैं। 22 जुलाई को शिवाजी पार्क में करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। इस मामले में उद्धव ठाकरे और NCP (SP) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली एक याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।