Maharashtra: मुंबई में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनाने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर Deven Bharti ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का फैसला किया है। आरोप
Maharashtra: मुंबई में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनाने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर Deven Bharti ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का फैसला किया है। आरोप है कि 2024 से 2026 के बीच हजारों फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए गए, जिनका इस्तेमाल अवैध तरीके से भारतीय पहचान पत्र और आधार कार्ड बनवाने के लिए किया गया।
SIT का गठन क्यों किया गया और कौन करेगा जांच
मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच पहले से ही इस मामले की जांच कर रही थी। जब पता चला कि यह जाल बहुत बड़ा है, तब कमिश्नर ने SIT बनाने का आदेश दिया। इस टीम का नेतृत्व Joint Commissioner of Police (Crime) Lakhmi Gautam कर रही हैं। इसमें क्राइम ब्रांच के एडिशनल कमिश्नर और स्पेशल ब्रांच के अधिकारी भी शामिल हैं। यह टीम उन लोगों और अधिकारियों की तलाश करेगी जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ये सर्टिफिकेट जारी किए।
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खेल और कितने सर्टिफिकेट रद्द हुए
जांच में सामने आया कि BMC के स्वास्थ्य विभाग में पुराने SAP सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर ये फर्जी सर्टिफिकेट बनाए गए, जबकि अनिवार्य Civil Registration System (CRS) पोर्टल को नजरअंदाज किया गया। मेयर Ritu Tawde ने 2024 से 2026 के बीच जारी हुए 87,347 संदिग्ध सर्टिफिकेट को रद्द करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, अवैध निवासियों को दिए गए 237 फर्जी सर्टिफिकेट भी जब्त किए गए हैं।
नए नियम क्या हैं और अब क्या होगा बदलाव
राज्य सरकार ने फर्जीवाड़े को रोकने के लिए Birth and Death Registration Act, 1969 में बदलाव किए हैं। अब एक साल से ज्यादा देरी से बनने वाले सर्टिफिकेट केवल Tehsildars, Taluka Magistrates, SDM या District Magistrates द्वारा ही मंजूर किए जाएंगे। इसके अलावा, अब केवल आधार कार्ड को जन्म तिथि या स्थान के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। राजस्व विभाग ने इसके लिए 16 पॉइंट की वेरिफिकेशन गाइडलाइन भी जारी की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई में कितने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मिलने की खबर है?
मेयर Ritu Tawde के निर्देशानुसार 2024 से 2026 के बीच जारी हुए लगभग 87,347 संदिग्ध सर्टिफिकेट को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
अब बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के नियम में क्या बदलाव हुआ है?
अब एक साल से अधिक देरी से आवेदन करने पर सर्टिफिकेट केवल तहसीलदार या जिला मजिस्ट्रेट जैसे उच्च अधिकारियों द्वारा ही मंजूर किया जाएगा और अकेले आधार कार्ड को प्रमाण नहीं माना जाएगा।