Mumbai में महिला प्रदर्शनकारी को पकड़ने वाले सादे कपड़ों के पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, विपक्ष ने की कार्रवाई की मांग
Maharashtra/Mumbai: मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में छात्रों के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा महिला प्रदर्शनकारी को पकड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना के
Maharashtra/Mumbai: मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में छात्रों के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा महिला प्रदर्शनकारी को पकड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्षी नेता पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं। यह मामला तब सामने आया जब छात्र NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को इस वीडियो पर अपनी सफाई दी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह संदर्भ से बाहर है। DCP (ऑपरेशंस) अकबर पठान ने बताया कि सादे कपड़ों में तैनात अधिकारी वास्तव में एक पुरुष प्रदर्शनकारी को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसी समय एक महिला अनजाने में उनके बीच में आ गई। पुलिस के मुताबिक, अधिकारी की नजर दूसरी तरफ थी, इसलिए यह हादसा हुआ।
इस मामले में कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ और NCP (शरदचंद्र पवार) नेता रोहित पवार ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने X पर वीडियो साझा करते हुए पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाए और आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और बर्खास्तगी की मांग की है। वहीं, BJP प्रवक्ता नवनाथ बान ने पुलिस का बचाव किया और विपक्षी नेताओं पर राजनीतिक अवसरवादिता का आरोप लगाया।
मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो के आधार पर नतीजा निकालने से पहले तथ्यों की जांच कर लें। वरिष्ठ अधिकारियों ने फुटेज की समीक्षा की है और पुलिस के दावे की पुष्टि की है। फिलहाल इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया गया है और न ही किसी अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा हुई है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही कांस्टेबल पवन सांगले का तबादला किया गया था। उन पर प्रदर्शनकारियों को ’50 ग्राम पाउडर’ की धमकी देने का आरोप लगा था। सादे कपड़ों में पुलिस की तैनाती को लेकर रिटायर्ड अधिकारियों का कहना है कि खुफिया जानकारी जुटाने के लिए यह एक पुरानी प्रक्रिया है, लेकिन पहचान छिपाकर बल प्रयोग करने पर जवाबदेही का सवाल बना रहता है।