Mumbai में फर्जी SIM कार्ड का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, कई मोबाइल दुकानदारों पर FIR दर्ज

Maharashtra: मुंबई पुलिस ने साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि शहर के कई मोबाइल रिटेलर्स फर्जी या अधूरे KYC दस्तावेजों के आधार पर SIM कार्ड एक्टिवेट कर रहे थे। इ

Maharashtra: मुंबई पुलिस ने साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि शहर के कई मोबाइल रिटेलर्स फर्जी या अधूरे KYC दस्तावेजों के आधार पर SIM कार्ड एक्टिवेट कर रहे थे। इन गुमनाम नंबरों को बाद में जालसाजों को बेचा गया, जिनका इस्तेमाल महाराष्ट्र भर में लोगों को ठगने के लिए किया गया।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब साउथ साइबर पुलिस ने 18 अप्रैल से 27 जून के बीच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर मिली शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया। इस मामले में पुलिस कॉन्स्टेबल संतोष अमृतराव गलंडे ने FIR दर्ज कराई, जिसके बाद सब-इंस्पेक्टर दीपेश शिंदे और असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर त्रिमुखे ने जांच शुरू की।

पुलिस ने पाया कि भण्डुप, कांदिवली और अंधेरी जैसे इलाकों की दुकानों में नियमों की अनदेखी की गई। जिन दुकानों की जांच हो रही है उनमें राहुल कम्युनिकेशन, अभि टेलीकॉम, महाकाल मोबाइल, आदित्य टेलीकॉम, VMS द मोबाइल स्टूडियो WTS और HS एजेंट्स जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि दुकानदारों ने जानबूझकर KYC नियमों को तोड़ा या फिर उनके क्रेडेंशियल्स का गलत इस्तेमाल हुआ।

इन फर्जी सिम कार्डों के जरिए जालसाजों ने लोगों को नकली नौकरी के ऑफर, ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम और लॉटरी के नाम पर ठगा। साउथ साइबर पुलिस ने संबंधित रिटेलर्स और सिम ग्राहकों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अब इन दुकानदारों और बिचौलियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क के मुनाफे और विस्तार का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने साफ किया है कि ऐसे गुमनाम सिम कार्ड साइबर अपराध की जांच में बड़ी बाधा बनते हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं।