Maharashtra: मुंबई पुलिस ने एक हाई-टेक साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसमें WhatsApp अकाउंट्स को क्लोन करके ग्लोबल स्कैम चलाया जा रहा था। इस मामले में त्रिपुरा से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह पूरा मामला तब स
Maharashtra: मुंबई पुलिस ने एक हाई-टेक साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसमें WhatsApp अकाउंट्स को क्लोन करके ग्लोबल स्कैम चलाया जा रहा था। इस मामले में त्रिपुरा से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब दिसंबर 2024 में मुंबई के एक डिजाइनर से 33.5 लाख रुपये की ठगी हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने इस बड़े रैकेट की जांच शुरू की।
कैसे काम करता था यह क्लोनिंग नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, यह गैंग मासूम लोगों के नाम पर सिम कार्ड लेता था और फिर उनसे WhatsApp और Telegram अकाउंट बनाता था। गिरफ्तार आरोपियों में अभिजित शिल नाम का व्यक्ति सिम एजेंट था, जिसने 30 से ज्यादा सिम कार्ड मुहैया कराए। शांतनु सेन ने इन अकाउंट्स को बनाने और OTP शेयर करने के लिए ग्रुप बनाने में मदद की। इन क्लोन किए गए अकाउंट्स वाले डिवाइस को कंबोडिया जैसे देशों में भेजा जाता था, जहां से विदेशी अपराधी भारतीय लोगों को निशाना बनाते थे।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी
यह गिरोह लोगों को डराने के लिए TRAI, CBI और दिल्ली पुलिस जैसे बड़े अधिकारियों का नाम इस्तेमाल करता था। वे खुद को IPS अधिकारी बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देते थे और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाते थे। इस तरीके से मुंबई और नागपुर के कई लोग शिकार हुए।
- दिसंबर 2024: मुंबई के डिजाइनर से 33.5 लाख रुपये की ठगी।
- फरवरी 2026: मुलुंड के 78 वर्षीय व्यक्ति से 1.16 करोड़ रुपये की ठगी।
- अप्रैल 2026: ठाणे जिले के एक व्यक्ति से 28 लाख रुपये की ठगी।
- मई 2026: नागपुर के 73 वर्षीय व्यक्ति से 1.04 करोड़ रुपये की ठगी।
सरकार और पुलिस ने क्या कदम उठाए
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि WhatsApp अब केवल अकाउंट ही नहीं, बल्कि उन डिवाइस आईडी को भी ब्लॉक करने की संभावना तलाश रहा है जो डिजिटल अरेस्ट स्कैम में शामिल हैं। साथ ही, सिम कार्ड की सही पहचान के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की मांग की गई है ताकि धोखाधड़ी करने वाले नंबरों को तुरंत बंद किया जा सके। त्रिपुरा पुलिस ने भी लोगों को चेतावनी दी है कि वे WhatsApp पर आने वाले संदिग्ध ट्रैफिक चालान लिंक पर क्लिक न करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
इसमें जालसाज खुद को CBI, पुलिस या TRAI अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और कहते हैं कि वे डिजिटल हिरासत में हैं। डर के मारे लोग उन्हें लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते हैं।
साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
पीड़ित को तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में जाना चाहिए। इसके अलावा इमरजेंसी नंबर 112 या 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करानी चाहिए।