Maharashtra : मुंबई की एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने 35 साल के एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। यह शख्स 11 साल की बच्ची के साथ बार-बार गैंगरेप करने के आरोप में पिछले करीब 12 सालों से जेल में बंद था। अदालत ने पाया कि इस मामले में
Maharashtra : मुंबई की एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने 35 साल के एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। यह शख्स 11 साल की बच्ची के साथ बार-बार गैंगरेप करने के आरोप में पिछले करीब 12 सालों से जेल में बंद था। अदालत ने पाया कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले, जिसके बाद उसे रिहा करने का आदेश दिया गया।
अदालत ने उम्र और सबूतों पर क्या कहा
कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र को लेकर कागजों में बड़ी गड़बड़ी थी। एक तरफ बर्थ सर्टिफिकेट में उसकी उम्र 11 साल बताई गई थी, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के रिकॉर्ड के हिसाब से उसकी उम्र 21 साल आ रही थी। जज ने कहा कि सरकारी गवाहों ने उस अधिकारी को पेश नहीं किया जिसने बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया था, इसलिए उम्र तय नहीं हो सकी। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट में भी बार-बार यौन शोषण की बात साबित नहीं हुई।
FIR में देरी और अन्य कानूनी बिंदु
जज ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पुलिस ने FIR दर्ज करने में दो दिन की देरी की। कोर्ट के मुताबिक बिना किसी ठोस वजह के इतनी देरी यह इशारा करती है कि शिकायत शायद सोच-समझकर बाद में दर्ज कराई गई। केस के अन्य आरोपियों की बात करें तो एक की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी और तीसरा आरोपी नाबालिग था, जिसका केस अलग से चलाया गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आरोपी को बरी करने का मुख्य कारण क्या था?
अदालत ने पीड़िता की उम्र के कागजों में अंतर और मेडिकल रिपोर्ट में पुख्ता सबूत न मिलने की वजह से आरोपी को बरी किया।
यह मामला कब का था और आरोपी कितने समय जेल में रहा?
यह मामला साल 2014 का था और आरोपी करीब 12 साल तक जेल में बंद रहा।