Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने नाबालिग से रेप के मामले में एक 35 साल के व्यक्ति को बरी कर दिया है। यह व्यक्ति पिछले 12 साल से जेल में बंद था। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने नाबालिग से रेप के मामले में एक 35 साल के व्यक्ति को बरी कर दिया है। यह व्यक्ति पिछले 12 साल से जेल में बंद था। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले और अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर पाया।
कोर्ट ने बरी करने के क्या कारण बताए?
स्पेशल जज N. D. Khose ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि FIR दर्ज कराने में दो दिन की देरी हुई थी, जिसका कोई ठोस कारण नहीं दिया गया। कोर्ट ने माना कि यह शिकायत बाद में सोच-समझकर की गई हो सकती है। इसके अलावा, मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टर के बयान भी आरोपी के खिलाफ नहीं थे। डॉक्टर ने गवाही दी कि हाइमन का फटना सिर्फ यौन संबंध के कारण नहीं, बल्कि अन्य गतिविधियों से भी हो सकता है।
उम्र को लेकर क्या था विवाद?
इस केस में पीड़िता की उम्र को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई। जन्म प्रमाण पत्र के मुताबिक उसकी जन्मतिथि 4 मार्च 2003 थी, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में यह 4 मई 1993 बताई गई। अगर मेडिकल रिपोर्ट सही होती, तो 2014 की घटना के समय पीड़िता की उम्र 11 साल के बजाय 21 साल होती। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी से पूछताछ नहीं की गई थी।
केस की अन्य अहम बातें
पीड़िता की मां ने कोर्ट में माना कि पड़ोसियों की सलाह पर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में एक अन्य आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी, जबकि एक नाबालिग आरोपी का केस अलग से चलाया गया। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ हाइमन का फटना यौन संबंध होने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आरोपी को कितने साल बाद रिहा किया गया?
आरोपी 12 साल तक जेल में रहा, जिसके बाद सबूतों की कमी के कारण मुंबई की स्पेशल POCSO कोर्ट ने उसे बरी किया।
कोर्ट ने उम्र को लेकर क्या पाया?
कोर्ट ने पाया कि जन्म प्रमाण पत्र और मेडिकल रिपोर्ट में उम्र अलग-अलग थी, जिससे पीड़िता की वास्तविक उम्र पर संदेह पैदा हुआ।