Maharashtra: अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद भी खाड़ी देशों से तेल और LPG टैंकर मुंबई पहुंच रहे हैं। इस तनाव के बीच भारतीय जहाजों ने जोखिम उठाकर अपनी यात्रा पूरी की है। आम लोगों के लिए यह खबर इसलिए जर
Maharashtra: अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद भी खाड़ी देशों से तेल और LPG टैंकर मुंबई पहुंच रहे हैं। इस तनाव के बीच भारतीय जहाजों ने जोखिम उठाकर अपनी यात्रा पूरी की है। आम लोगों के लिए यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि तेल की सप्लाई सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों और उपलब्धता को प्रभावित करती है।
मुंबई पहुंचे कौन से भारतीय जहाज और कितना तेल आया
भारतीय क्रूड ऑयल टैंकर ‘Desh Garima’ पिछले बुधवार (23 अप्रैल 2026) को मुंबई पहुंचा। यह जहाज कतर के Ras Laffan से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, रास्ते में इस जहाज पर ईरानी सेना की फायरिंग भी हुई थी। इसके अलावा ‘Jag Vikram’ और ‘Green Sanvi’ जैसे LPG टैंकर भी सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल तक पहुंच चुके हैं।
अमेरिकी नाकेबंदी के बीच जहाज कैसे निकल रहे हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने Strait of Hormuz में कुछ वैकल्पिक रास्ते (Alternative Routes) बनाए हैं। इसमें एक ‘डुअल-कॉरिडोर सिस्टम’ है, जिसमें एक रास्ता IRGC के कंट्रोल में है और दूसरा ओमान के तट के पास है। इन रास्तों और नौसेना के आपसी तालमेल की वजह से अमेरिकी नाकेबंदी का असर कम हो रहा है और जहाज मुंबई पहुंच पा रहे हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या चल रहा है विवाद
अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू की थी। जवाब में ईरान की IRGC ने कई बार Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया और जहाजों पर हमले किए। 27-28 अप्रैल को ईरान ने प्रस्ताव दिया कि अगर अमेरिका नाकेबंदी हटा ले और युद्ध खत्म करे, तो वह रास्ता खोल देगा। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव को मानने की संभावना कम बताई जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिकी नाकेबंदी से भारत में तेल की सप्लाई रुकेगी?
फिलहाल नहीं, क्योंकि ‘Desh Garima’ जैसे टैंकर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर मुंबई पहुंच रहे हैं और सरकार तेल की सुरक्षित सप्लाई के लिए निगरानी रख रही है।
ईरान ने जहाजों के लिए कौन सा नया रास्ता बताया है?
ईरान ने एक ‘डुअल-कॉरिडोर सिस्टम’ बनाया है, जिसमें एक रास्ता IRGC के नियंत्रण में है और दूसरा ओमान के तट के पास है, ताकि जहाजों को समुद्री माइन्स से बचाया जा सके।