Finance: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में हुए 122 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी राजीव रंजन पांडेय को जमानत दे दी है। पांडेय मार्च 2025 से जेल में थे और उन्होंने एक साल से ज्यादा समय हिरासत
Finance: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में हुए 122 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी राजीव रंजन पांडेय को जमानत दे दी है। पांडेय मार्च 2025 से जेल में थे और उन्होंने एक साल से ज्यादा समय हिरासत में बिताया। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक फर्जी नाम का इस्तेमाल कर घोटाले के पैसों में से 15 करोड़ रुपये लिए थे।
जमानत मिलने की शर्तें और कोर्ट का फैसला क्या था?
कोर्ट ने कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ या आरोपी के भागने के डर को कड़ी शर्तों के जरिए रोका जा सकता है। कोर्ट ने पांडेय के झारखंड में स्थाई पते और उनके बिजनेस को देखते हुए उन्हें जमानत दी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें प्रोबेशन का लाभ देने से मना कर दिया। उन्हें रिहाई के लिए ये शर्तें माननी होंगी:
- 5 लाख रुपये की कैश बेल जमा करनी होगी, जो एक महीने के लिए मान्य होगी।
- एक हफ्ते के भीतर अपना पासपोर्ट कोर्ट में जमा करना होगा।
- गवाहों पर दबाव डालने या न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने की सख्त मनाही है।
- बिना अनुमति के किसी भी सुनवाई से अनुपस्थित नहीं रह सकते।
बैंक घोटाले की पूरी कहानी और अब तक की कार्रवाई
यह पूरा मामला प्रभादेवी स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़ा है। आरबीआई के अधिकारियों ने 12 फरवरी 2025 को जांच के दौरान बैंक में 122 करोड़ रुपये की कमी पाई थी। इस मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच कर रहे हैं।
| नाम |
भूमिका/आरोप |
| राजीव रंजन पांडेय |
झारखंड के होटल व्यवसायी, कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये प्राप्त किए |
| हितेश मेहता |
पूर्व जनरल मैनेजर, मुख्य आरोपी माना गया |
| हिरेन भानु |
बैंक के पूर्व चेयरमैन, 17 करोड़ की संपत्ति ED ने कुर्क की |
| गौरी भानु |
पूर्व उपाध्यक्ष, हिरेन भानु की पत्नी |
| उन्नथन अरुणभाई |
व्यवसायी, जिसने कथित तौर पर पांडेय को पैसे ट्रांसफर किए |
Frequently Asked Questions (FAQs)
न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला कितना बड़ा था?
यह घोटाला कुल 122 करोड़ रुपये का था, जिसका पता 12 फरवरी 2025 को आरबीआई की जांच के दौरान चला था।
राजीव रंजन पांडेय पर क्या आरोप लगे थे?
पांडे पर आरोप था कि उन्होंने ‘पवन गुप्ता’ जैसे फर्जी नाम का इस्तेमाल कर घोटाले के फंड से 15 करोड़ रुपये लिए थे।