Mumbai और Navi Mumbai में दो अलग हादसों में गिरे बिल्डिंग स्लैब, 2 लोगों की मौत
Maharashtra: मुंबई और नवी मुंबई में पिछले 24 घंटों के भीतर दो अलग-अलग बिल्डिंग स्लैब गिरने की घटनाओं में दो लोगों की जान चली गई। पहली घटना दक्षिण मुंबई के वॉल्केश्वर इलाके में हुई और दूसरी नवी मुंबई के कामोठे में। मानसून
Maharashtra: मुंबई और नवी मुंबई में पिछले 24 घंटों के भीतर दो अलग-अलग बिल्डिंग स्लैब गिरने की घटनाओं में दो लोगों की जान चली गई। पहली घटना दक्षिण मुंबई के वॉल्केश्वर इलाके में हुई और दूसरी नवी मुंबई के कामोठे में। मानसून की बारिश के बीच हुए इन हादसों ने पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दक्षिण मुंबई के बाबुलनाथ रोड पर स्थित सूर्या प्रकाश नाम की बिल्डिंग का स्लैब गिर गया। यह बिल्डिंग MHADA की है और इसमें तीन मंजिलें हैं। मंगलवार रात करीब 11:22 बजे जब यह हादसा हुआ, तब वहां से गुजर रहे 51 वर्षीय संतोष भास्कर मलबे की चपेट में आ गए। संतोष पास के ही एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे। उन्हें तुरंत Sir J. J. Hospital ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। BMC अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण मुंबई की कई पुरानी इमारतें 1800 के अंत और 1940 के बीच बनी थीं, जिनमें भारी बारिश और पानी के रिसाव की वजह से कमजोरी आ गई है। पुलिस और नगर निगम अब इस हादसे की जांच कर रहे हैं और बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल असेसमेंट किया जाएगा।
वहीं नवी मुंबई के कामोठे सेक्टर 10 में बुधवार सुबह करीब 6 बजे साई सिद्धि बिल्डिंग का स्लैब गिर गया। इस हादसे में 45 साल के सुरेश लोखंडे की मौत हो गई। उनके साथ उनकी 12 साल की बेटी भी थी, जो घायल हुई है लेकिन अब खतरे से बाहर है। उनकी पत्नी को ज्यादा चोट नहीं आई है। पनवेल नगर निगम के कमिश्नर मंगेश चितले ने बताया कि यह बिल्डिंग 2010 में बनी थी और यह जर्जर इमारतों की सूची में शामिल नहीं थी। प्रशासन ने अब सोसाइटी के पदाधिकारियों को बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और उसकी रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए हैं।
मुंबई महानगर क्षेत्र में इमारतों की सुरक्षा को लेकर BMC ने इस मानसून सीजन के लिए 174 इमारतों को C1 श्रेणी (अत्यधिक खतरनाक) में रखा है, जिन्हें तुरंत खाली करना जरूरी है। इसके अलावा, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में राज्य सरकार को निर्माणाधीन ऊंची इमारतों के लिए सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया था। दक्षिण मुंबई की ‘सेस्ड’ इमारतों के रखरखाव की कमी अब आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।