Mumbai में BMC इंजीनियरों का प्रदर्शन, मानसून हादसे में सस्पेंड हुए अधिकारियों की बहाली की मांग

Maharashtra/Mumbai : मुंबई में मानसून के दौरान हुए दो बड़े हादसों के बाद सस्पेंड किए गए इंजीनियरों के समर्थन में Municipal Engineers Union ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को यूनियन के सदस्यों ने BMC के M-West वार्ड ऑफिस के

Maharashtra/Mumbai : मुंबई में मानसून के दौरान हुए दो बड़े हादसों के बाद सस्पेंड किए गए इंजीनियरों के समर्थन में Municipal Engineers Union ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को यूनियन के सदस्यों ने BMC के M-West वार्ड ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इंजीनियरों का कहना है कि उन्हें बिना किसी उचित जांच के बलि का बकरा बनाया जा रहा है और सस्पेंशन के फैसले को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

यह पूरा विवाद दो दर्दनाक घटनाओं से जुड़ा है। पहली घटना 30 जून को Chembur में हुई थी, जहां एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। इस मामले में तीन इंजीनियरों को सस्पेंड किया गया। वहीं दूसरी घटना 2 जुलाई को Saki Naka में हुई, जहां एक 55 वर्षीय व्यक्ति खुले मैनहोल में गिर गया और उसकी जान चली गई। इस हादसे के बाद L वार्ड के चार अधिकारियों, जिनमें असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर धनजी हर्लेकर भी शामिल हैं, को सस्पेंड कर दिया गया।

यूनियन के प्रतिनिधि नवनाथ घड़गे का तर्क है कि Chembur में पेड़ भारी बारिश की वजह से गिरा था, इसमें किसी की लापरवाही नहीं थी। वहीं मैनहोल हादसे को लेकर उनका कहना है कि इंजीनियरों को ग्रिल लगाने के काम की जानकारी ही नहीं दी गई थी। यूनियन ने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही कार्रवाई करना नियमों के खिलाफ है।

दूसरी तरफ, BMC की शुरुआती जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मैनहोल का काम बिना किसी औपचारिक वर्क ऑर्डर के चल रहा था और मानसून शुरू होने के बाद भी काम जारी था, जबकि 31 मई के बाद ऐसे कामों पर रोक थी। म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिडे ने इन लापरवाहियों को देखते हुए सस्पेंशन के आदेश दिए थे।

इस बीच Bombay High Court ने भी BMC की तैयारियों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने BMC के उस हलफनामे को स्वीकार किया है जिसमें सभी 26 वार्डों में 10 दिनों के भीतर 100% मैनहोल कवर की जांच करने की बात कही गई है। कोर्ट ने सवाल किया है कि क्या BMC इस मानसून में खुले मैनहोल से होने वाले हादसों को रोकने की गारंटी दे सकती है।

मामला अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने मैनहोल हादसे को ‘गैर इरादतन हत्या’ बताया है, जबकि शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने विधानसभा में सुरक्षा चूक की बात स्वीकार की है।