Maharashtra: मुंबई के मुलुंड इलाके में कचरे के पहाड़ को साफ करने का काम एक बार फिर अटक गया है। BMC और ठेकेदार के बीच समय सीमा को लेकर खींचतान चल रही है, जिससे स्थानीय लोगों को गंदगी और बदबू से राहत मिलने में और देरी होगी
Maharashtra: मुंबई के मुलुंड इलाके में कचरे के पहाड़ को साफ करने का काम एक बार फिर अटक गया है। BMC और ठेकेदार के बीच समय सीमा को लेकर खींचतान चल रही है, जिससे स्थानीय लोगों को गंदगी और बदबू से राहत मिलने में और देरी होगी। अब इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन को बढ़ाकर जनवरी 2027 करने का प्रस्ताव दिया गया है।
काम में देरी की क्या हैं मुख्य वजहें?
Bio Mining India Private Limited नाम की कंपनी इस काम को संभाल रही है। कंपनी ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से डीजल की कमी हो गई, जिससे भारी मशीनों और गाड़ियों का चलना मुश्किल हो गया। इसके अलावा, शुरुआती सर्वे में जितना कचरा बताया गया था, उससे 10 लाख मीट्रिक टन ज्यादा कचरा वहां पाया गया है। मानसून की वजह से भी बायो-माइनिंग का काम रुक गया था और लगभग 7 लाख मीट्रिक टन प्रोसेस्ड कचरा अभी भी साइट से बाहर ले जाना बाकी है।
BMC ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
BMC के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के डिप्टी कमिश्नर किरण दिघावकर ने कहा कि काम पूरा करने के लिए जनवरी 2027 तक का समय मांगा गया है, जिसे स्टैंडिंग कमेटी के सामने रखा जाएगा। काम में देरी के कारण BMC ने ठेकेदार पर करीब 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि नए टेंडर निकालने के बजाय मौजूदा एजेंसी से ही काम कराना बेहतर होगा क्योंकि उनके पास पहले से मशीनें और मजदूर मौजूद हैं।
साफ होने के बाद इस जमीन का क्या होगा?
मुलुंड के विधायक मिहिर कोटेचा ने मांग की है कि इस साफ की गई जमीन पर एक गोल्फ कोर्स बनाया जाए। हालांकि, BMC ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। दूसरी तरफ, पर्यावरण संस्था Vanashakti के डायरेक्टर स्टालिन दयानंद ने चेतावनी दी है कि डंपिंग ग्राउंड की जमीन पर कोई भी निर्माण करने से पहले नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है, वरना भविष्य में पर्यावरण को बड़ा खतरा हो सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुलुंड डंप ग्राउंड की सफाई कब तक पूरी होगी?
BMC अब इस काम को पूरा करने के लिए जनवरी 2027 तक का समय प्रस्तावित कर रही है, जबकि अधिकारियों को उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक प्रोसेस पूरा हो जाएगा।
बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट में देरी का मुख्य कारण क्या है?
देरी के मुख्य कारणों में पश्चिम एशिया के तनाव के कारण डीजल की कमी, सर्वे से 10 लाख टन ज्यादा कचरा मिलना और मानसून की बारिश शामिल हैं।