Maharashtra: मुंबई के गोरेगांव में 248 करोड़ रुपये की लागत से बना Mrinal Tai Gore फ्लाईओवर एक्सटेंशन खुलते ही विवादों में घिर गया है। शनिवार, 6 जून 2026 को मेयर Ritu Tawde ने इसका उद्घाटन किया और शाम को इसे गाड़ियों के ल
Maharashtra: मुंबई के गोरेगांव में 248 करोड़ रुपये की लागत से बना Mrinal Tai Gore फ्लाईओवर एक्सटेंशन खुलते ही विवादों में घिर गया है। शनिवार, 6 जून 2026 को मेयर Ritu Tawde ने इसका उद्घाटन किया और शाम को इसे गाड़ियों के लिए खोल दिया गया। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर सड़क की सतह (surface) के पैची और ऊबड़-खाबड़ होने की शिकायतें आने लगीं।
फ्लाईओवर की खराब हालत पर क्या बोले अधिकारी और नेता
मुंबई की मेयर Ritu Tawde ने कहा है कि घटिया काम को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वह सोमवार, 8 जून को खुद साइट का निरीक्षण करेंगी। उन्होंने ऐलान किया कि अगर काम घटिया पाया गया, तो IIT Bombay जैसे संस्थान से टेक्निकल ऑडिट कराया जाएगा। इसके बाद जिम्मेदार ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने, पेमेंट रोकने और सुपरवाइजिंग अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आदित्य ठाकरे और कांग्रेस-NCP के नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
BMC ने अपनी सफाई में क्या कहा
नगर निगम (BMC) ने रविवार को स्पष्ट किया कि फ्लाईओवर की बनावट में कोई कमी नहीं है। BMC अधिकारियों के मुताबिक, सड़क की सतह का ऊबड़-खाबड़ दिखना एक सामान्य बात है क्योंकि ‘मस्टिक डामर’ (mastic asphalt) को पूरी तरह सेट होने में समय लगता है। उन्होंने बताया कि जोड़ों (joints) की वजह से भी ऐसा लग सकता है। निगम ने कहा कि सड़क पर मौजूद अतिरिक्त ग्रिट को हटा दिया जाएगा और एंटी-स्किड सतह के लिए हल्के रोलर का इस्तेमाल किया जाएगा।
प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य बातें
यह फ्लाईओवर 750 मीटर लंबा और चार लेन का है। इसकी शुरुआती लागत 209 करोड़ रुपये तय की गई थी, जो बाद में बढ़कर 248 करोड़ रुपये हो गई। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में तय समय से 40 महीने की देरी हुई। इसे बनाने वाले ठेकेदार M/s MEPL–Gyan JV पर पहले भी समय सीमा खत्म होने के कारण 26 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Mrinal Tai Gore फ्लाईओवर की कुल लागत कितनी है और इसमें कितनी देरी हुई
इस फ्लाईओवर एक्सटेंशन की कुल लागत 248 करोड़ रुपये रही, जो शुरुआती अनुमान 209 करोड़ से ज्यादा थी। यह प्रोजेक्ट अपनी तय समय सीमा से 40 महीने की देरी से पूरा हुआ है।
सड़क की सतह खराब होने पर BMC का क्या तर्क है
BMC का कहना है कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि मस्टिक डामर की सेटिंग प्रक्रिया पूरी न होने के कारण सड़क ऊबड़-खाबड़ दिख रही है, जो कि सामान्य है।