Mumbai में मानसून के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा, वायरल बुखार और डेंगू समझने की गलती पड़ सकती है भारी
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में भारी बारिश और जलजमाव के बीच डॉक्टरों ने लेप्टोस्पायरोसिस नाम की बीमारी को लेकर चेतावनी जारी की है। अक्सर लोग इसे सामान्य वायरल बुखार, डेंगू या मलेरिया समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर
Maharashtra/Mumbai: मुंबई में भारी बारिश और जलजमाव के बीच डॉक्टरों ने लेप्टोस्पायरोसिस नाम की बीमारी को लेकर चेतावनी जारी की है। अक्सर लोग इसे सामान्य वायरल बुखार, डेंगू या मलेरिया समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकता है। यह बीमारी संक्रमित जानवरों, खासकर चूहों के पेशाब से दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क में आने से फैलती है।
मुंबई के डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी के शुरुआती लक्षण जैसे तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और थकान बिल्कुल वैसे ही होते हैं जैसे किसी आम मौसमी बुखार में दिखते हैं। डॉ अजय शाह (Neuberg Ajay Shah Laboratory) और डॉ करण ठक्कर (Apex Group of Hospitals) ने बताया कि लक्षणों में समानता के कारण मरीज सही समय पर इलाज नहीं करा पाते। अगर सही समय पर पहचान न हो, तो यह संक्रमण किडनी, लिवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अंदरूनी ब्लीडिंग या ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
बीएमसी (BMC) ने 6 जुलाई 2026 को एक हेल्थ एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को सतर्क किया है। बीएमसी के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने कहा है कि जिन लोगों ने जलजमाव वाले रास्तों पर पैदल यात्रा की है, खासकर जिन्हें शरीर पर कोई चोट या घाव है, उन्हें 24 से 72 घंटों के भीतर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और बचाव का इलाज शुरू करना चाहिए। दूषित बाढ़ के पानी में मौजूद लेप्टोस्पिरा बैक्टीरिया त्वचा के छोटे से घाव के जरिए भी शरीर में घुस सकता है।
मरीजों की मदद के लिए बीएमसी ने हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ‘आपला दवाखाना’ क्लीनिक, नगर निगम स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में मुफ्त परामर्श, जांच और बचाव की दवाइयां उपलब्ध कराई हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने भी इसे भारत में एक गंभीर जूनोटिक बीमारी माना है, जो भारी बारिश और बाढ़ के बाद तेजी से बढ़ती है।