Maharashtra: मुंबई के गोरेगांव स्थित सिद्धार्थ नगर सहकारी गृह निर्माण संस्था के सदस्यों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर सोसायटी के सदस्य 30 अप्रैल 2026 तक अपने फ्लैट्स का कब्ज
Maharashtra: मुंबई के गोरेगांव स्थित सिद्धार्थ नगर सहकारी गृह निर्माण संस्था के सदस्यों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर सोसायटी के सदस्य 30 अप्रैल 2026 तक अपने फ्लैट्स का कब्जा नहीं लेते हैं, तो MHADA इन खाली फ्लैट्स का इस्तेमाल पब्लिक हाउसिंग के लिए कर सकता है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने कहा कि सदस्यों को पर्याप्त समय दिया जा चुका है।
कब्जा लेने की आखिरी तारीख और नियम क्या हैं?
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सदस्यों के पास अपने घर का कब्जा लेने के लिए 30 अप्रैल 2026 तक का समय है। अगर इस तारीख तक कोई सदस्य कब्जा नहीं लेता है, तो MHADA उन फ्लैट्स को प्रोजेक्ट अफेक्टेड पर्सन्स (PAPs) या अन्य सरकारी आवास योजनाओं के लिए आवंटित कर देगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सदस्य बाद में अपना घर वापस चाहते हैं, तो वे तीन महीने का नोटिस देकर कब्जा पा सकते हैं।
इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
- 1 अप्रैल 2026: कोर्ट ने पब्लिक फंड पर बोझ कम करने के लिए सदस्यों को दिए जाने वाले ट्रांजिट रेंट (किराया) को रोकने का आदेश दिया।
- 3 मार्च 2026: कोर्ट ने बताया कि एग्रीमेंट में देरी की वजह से सरकारी खजाने पर करीब 18 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा है।
- अप्रैल 2025: इस प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिल चुका है और इमारतें रहने के लिए तैयार हैं।
- 2008: MHADA ने इस पुनर्विकास (Redevelopment) प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी।
लीज रेंट और बिल्डिंग की मजबूती पर क्या कहा गया?
सोसायटी के सदस्य लीज रेंट माफ करने की मांग कर रहे थे, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि जमीन MHADA की है और यह सार्वजनिक संपत्ति है। साथ ही, VJTI के डॉ. अभय बांभोले द्वारा किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में इमारतों को पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर पाया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर कोई सुरक्षित घरों में जाने से रोकता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जा सकता है।