Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने मेट्रो लाइन 4 के निर्माण के दौरान हुए हादसे में आरोपी वेल्डर रामशिश यादव को जमानत दे दी है। मुलुंड के LBS मार्ग पर हुए इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई थी और तीन लोग गंभीर र
Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने मेट्रो लाइन 4 के निर्माण के दौरान हुए हादसे में आरोपी वेल्डर रामशिश यादव को जमानत दे दी है। मुलुंड के LBS मार्ग पर हुए इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई थी और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। कोर्ट ने जमानत देते हुए समानता के सिद्धांत (Principle of Parity) का हवाला दिया है।
क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ हादसा
यह घटना 14 फरवरी 2026 को मुलुंड वेस्ट में हुई थी, जहां मेट्रो लाइन 4 का एक कंक्रीट पैरापेट हिस्सा अचानक नीचे गिर गया था। यह ढांचा एक ऑटो रिक्शा और कार पर गिरा, जिससे 50 वर्षीय रामधन यादव की मौत हो गई। पुलिस और जांच एजेंसियों का आरोप है कि वेल्डर रामशिश यादव ने जरूरी सुरक्षा नियमों की अनदेखी की और इंटरलॉकिंग हुक को काट दिया, जिससे यह हादसा हुआ।
कोर्ट ने जमानत देते समय क्या कहा
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम.बी. ओजा ने कहा कि आरोपी की हिरासत में पूछताछ पूरी हो चुकी है और अब उससे कुछ बरामद नहीं करना है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि आरोपी एक गरीब मजदूर है और उसका परिवार उसी पर निर्भर है। जज ने स्पष्ट किया कि जमानत एक नियम है और इसे मना करना अपवाद होना चाहिए। साथ ही, यह भी कहा गया कि हादसे की गंभीरता अकेले जमानत रोकने का आधार नहीं हो सकती।
इस केस में अब तक किसे-किसे मिली जमानत
रामशिश यादव इस मामले में जमानत पाने वाला आखिरी आरोपी है। उनसे पहले प्रोजेक्ट के बड़े अधिकारियों को कोर्ट से राहत मिल चुकी थी:
- हरिश चौहान (प्रोजेक्ट डायरेक्टर) – अप्रैल 2026 में जमानत मिली।
- कुलदीप सपकाल और अवधुत इनामदार (प्रोजेक्ट मैनेजर) – अप्रैल 2026 में जमानत मिली।
- सौरभ सिंह (प्रोजेक्ट इंजीनियर) – 6 अप्रैल 2026 को जमानत मिली।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मेट्रो 4 हादसे में वेल्डर पर क्या आरोप थे?
प्रॉसिक्यूशन का आरोप था कि Milan Road Buildtech LLP के कर्मचारी रामशिश यादव ने स्ट्रक्चर को सही तरीके से कंक्रीट नहीं किया और एक महत्वपूर्ण इंटरलॉकिंग हुक को काट दिया, जिससे पैरापेट गिर गया।
कोर्ट ने ‘प्रिंसिपल ऑफ पैरिटी’ का इस्तेमाल क्यों किया?
इस सिद्धांत के तहत, अगर एक ही मामले में समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपियों (जैसे प्रोजेक्ट अधिकारी) को पहले ही जमानत मिल चुकी हो, तो अन्य आरोपी भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।