Maharashtra: मुंबई के दारुखाना इलाके में मंगलवार को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने एक बड़ा तोड़फोड़ अभियान चलाया। कवाला बंदर के पास जमीन से अतिक्रमण हटाने के नाम पर करीब 100 घरों को गिरा दिया गया, जिससे लगभग 500 लोग बेघर
Maharashtra: मुंबई के दारुखाना इलाके में मंगलवार को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने एक बड़ा तोड़फोड़ अभियान चलाया। कवाला बंदर के पास जमीन से अतिक्रमण हटाने के नाम पर करीब 100 घरों को गिरा दिया गया, जिससे लगभग 500 लोग बेघर हो गए। सुबह 7 बजे शुरू हुआ यह अभियान दोपहर 11 बजे तक चला, जिसके बाद सैकड़ों महिलाएं और बच्चे गर्मी में खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हुए।
MbPA की कार्रवाई और निवासियों के दावे क्या हैं?
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की गई है क्योंकि ये घर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बने थे। MbPA के मुताबिक, केंद्र सरकार के अधीन होने के कारण उन पर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति लागू नहीं होती। दूसरी तरफ, वहां रहने वाले लोगों का दावा है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं और उनके पास 1949 और 1995 से पहले के दस्तावेज मौजूद हैं। निवासियों ने कोर्ट से स्टे लेने की कोशिश की थी, लेकिन कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाईं।
नेताओं ने क्यों जताया विरोध और क्या है विवाद?
इस कार्रवाई के बाद अलग-अलग पार्टियों के नेता मैदान में उतर आए हैं। शिवसेना (UBT) नेता अरविंद सावंत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि ये लोग 40 साल से यहां रह रहे हैं और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार इनका पुनर्वास होना चाहिए। बीजेपी मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी MbPA की आलोचना की और आरोप लगाया कि अथॉरिटी ने अपने ही आदेशों का पालन नहीं किया। वहीं, राज्यसभा सांसद मिलind Deora ने भी इस अभियान को रोकने और लोगों के पुनर्वास की मांग की है।
अब आगे क्या होगा और लोगों की हालत कैसी है?
बुधवार, 13 मई को भी तोड़फोड़ अभियान जारी रहने की संभावना है। इस कार्रवाई के बाद आसपास की बस्तियों में अचानक किराए बढ़ गए हैं क्योंकि बेघर हुए लोग वहां शरण ढूंढ रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सरकारी काम में बाधा डालने और गैरकानूनी जमावड़े के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MbPA ने घर क्यों गिराए और पुनर्वास पर क्या कहा?
MbPA का कहना है कि कवाला बंदर के पास की जमीन पर अवैध अतिक्रमण था, जिसे कोर्ट के आदेश पर हटाया गया। अथॉरिटी के अनुसार, पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर रहने वालों के लिए कोई पुनर्वास नीति नहीं है क्योंकि यह केंद्र सरकार के अधीन आता है।
निवासियों का दावा क्या है और उन्होंने क्या सबूत दिए हैं?
निवासियों का दावा है कि वे 1949 और 1995 के कट-ऑफ से पहले से यहां रह रहे हैं। उनके पास सरकारी सर्वे के दस्तावेज हैं, जिसके आधार पर वे कानूनी सुरक्षा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।