Mumbai में दुकानों पर मराठी बोर्ड लगाने की मुहिम ठिठकी, 2 महीने में सिर्फ 3% दुकानों की हुई जांच

Maharashtra: मुंबई में दुकानों और कमर्शियल ऑफिसों पर मराठी साइनबोर्ड लगाने का अभियान काफी धीमा पड़ गया है। सरकार ने इसके लिए समय सीमा तय की थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी शहर की केवल 3 प्रतिशत दुकानों की ही जांच ह

Maharashtra: मुंबई में दुकानों और कमर्शियल ऑफिसों पर मराठी साइनबोर्ड लगाने का अभियान काफी धीमा पड़ गया है। सरकार ने इसके लिए समय सीमा तय की थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी शहर की केवल 3 प्रतिशत दुकानों की ही जांच हो पाई है। इस वजह से कई दुकानें अभी भी बिना मराठी बोर्ड के चल रही हैं।

दरअसल, इस काम की जिम्मेदारी BMC के शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट विभाग की है, लेकिन वहां कर्मचारियों की भारी कमी है। विभाग में कुल 127 इंस्पेक्टरों के पद मंजूर हैं, जिनमें से केवल 57 लोग ही काम कर रहे हैं। यानी यह विभाग अपनी कुल क्षमता के 45 प्रतिशत पर ही चल रहा है। इसके अलावा, कई कर्मचारियों को जनगणना और वोटर लिस्ट के काम में लगा दिया गया, जिससे बोर्ड की जांच का काम और ज्यादा पिछड़ गया।

आंकड़ों की बात करें तो मुंबई में करीब 10.83 लाख कमर्शियल प्रतिष्ठान हैं, जिनमें से पिछले दो महीनों में सिर्फ 36,773 दुकानों की जांच हुई। जांच की गई इन दुकानों में से 1,124 ऐसी मिलीं जहां मराठी बोर्ड नहीं लगे थे।

नियम के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने फरवरी 2022 में कानून बदला था, जिसके तहत दुकानों पर मराठी बोर्ड लगाना अनिवार्य है और मराठी अक्षरों का आकार किसी भी अन्य भाषा से बड़ा और साफ होना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कुछ समय के लिए रोक लगाई थी, जिसे सितंबर 2023 में हटा लिया गया। इसके बाद BMC ने नवंबर 2023 की डेडलाइन दी थी और फिर मई 2026 में एक नया नोटिस जारी कर जून के मध्य तक बोर्ड लगाने को कहा था।

इस मामले में डिप्टी मेयर संजय घाडी ने चेतावनी दी थी कि नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, लॉ कमेटी की चेयरपर्सन दीक्षा करकर ने इस समस्या को सुलझाने के लिए उद्योग और मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत और म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिडे से संपर्क किया है ताकि खाली पदों को भरा जा सके और काम में तेजी आए।