Mumbai में घर खरीदना हुआ मुश्किल, शख्स ने बताया कैसे 80 लाख रुपये ब्लैक मनी की मांग की गई
Maharashtra: मुंबई जैसे बड़े शहर में अपना घर खरीदने का सपना देखना अब कई लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। हाल ही में एक व्यक्ति ने अपनी आपबीती सुनाई है कि कैसे ईमानदारी से घर खरीदने की कोशिश करने वालों को सिस्टम में परेशान
Maharashtra: मुंबई जैसे बड़े शहर में अपना घर खरीदने का सपना देखना अब कई लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। हाल ही में एक व्यक्ति ने अपनी आपबीती सुनाई है कि कैसे ईमानदारी से घर खरीदने की कोशिश करने वालों को सिस्टम में परेशानी झेलनी पड़ती है। इस शख्स को घर खरीदने के लिए 80 लाख रुपये ब्लैक मनी यानी काले धन के रूप में देने का दबाव बनाया गया।
यह मामला मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट की उस कड़वी सच्चाई को सामने लाता है जहां कागजी कीमत और असल मार्केट रेट में बहुत बड़ा अंतर होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी DLC रेट्स अक्सर मार्केट प्राइस से काफी कम होते हैं। इसी वजह से प्रॉपर्टी डीलर और बिल्डर इस अंतर की रकम को कैश या ब्लैक मनी के रूप में मांगते हैं, जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
ब्लैक मनी को रोकने के लिए सरकार ने कई कड़े कानून बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। इस संबंध में कुछ जरूरी नियम और कानून इस प्रकार हैं:
- Black Money Act, 2015: इस कानून के तहत विदेशी आय और संपत्ति को छिपाने पर 30% टैक्स और 90% जुर्माना लगाया जाता है।
- Finance Bill 2026: नए बदलावों के तहत, 20 लाख रुपये तक की छोटी और अनजाने में छूटी हुई विदेशी संपत्तियों (अचल संपत्ति को छोड़कर) पर अब कानूनी कार्रवाई से राहत दी गई है।
- Income Tax Act Section 68: राजस्व अधिकारी इस धारा का इस्तेमाल उन पैसों पर टैक्स लगाने के लिए करते हैं जिनका स्रोत व्यक्ति नहीं बता पाता है।
मुंबई के इस मामले ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि कैसे DLC रेट्स और इनकम टैक्स नियमों के बीच के गैप का फायदा उठाकर काले धन की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। आम खरीदार के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल हो जाती है क्योंकि वह बैंक लोन केवल सरकारी रेट के आधार पर ले पाता है, जबकि बाकी की भारी रकम उसे कहीं और से जुटानी पड़ती है।