Maharashtra : मुंबई में इन दिनों मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना मानसून के भी शहर में संक्रमण फैल रहा है। जनवरी से अप्रैल के बीच मुंबई में मलेरिया के 1,773 केस दर्ज हुए हैं, जो पूर
Maharashtra : मुंबई में इन दिनों मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना मानसून के भी शहर में संक्रमण फैल रहा है। जनवरी से अप्रैल के बीच मुंबई में मलेरिया के 1,773 केस दर्ज हुए हैं, जो पूरे महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यह शहर अब राज्य का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है।
मुंबई में मलेरिया के आंकड़े क्या कहते हैं?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 21 अप्रैल 2026 के बीच मुंबई में 1,773 मरीज मिले। इसकी तुलना में महाराष्ट्र के दूसरे सबसे प्रभावित जिले गढ़चिरौली में केवल 348 केस थे। साल 2025 में भी मुंबई में मामलों में करीब 30% की बढ़ोत्तरी हुई थी। सबसे चिंता की बात यह है कि मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ रही है, जो 2023-24 में 23 थी, वह 2025-26 में बढ़कर 27 हो गई है।
बीमारी के फैलने की वजह और एक्सपर्ट की राय
डॉ. गौरव गुप्ता और डॉ. अनीता मैथ्यू जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि अब मलेरिया सिर्फ बारिश के मौसम की बीमारी नहीं रही। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते शहरीकरण और समय पर जांच न होने की वजह से यह अब साल भर का खतरा बन गया है। शहर में चल रहे बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स और वहां जमा होने वाले पानी में मच्छरों का पनपना इस बीमारी के फैलने की मुख्य वजह है।
BMC ने बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?
World Malaria Day के मौके पर BMC ने एक नई रणनीति तैयार की है। प्रशासन ने ‘Zero Mosquito Breeding Campaign’ शुरू किया है, जिसके तहत स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास मच्छरों के प्रजनन को रोकने का काम चल रहा है। इसके लिए एक Rapid Response Action Committee बनाई गई है। साथ ही, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों और निजी डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि मरीजों की पहचान और इलाज जल्दी हो सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई में मलेरिया के कितने केस सामने आए हैं?
1 जनवरी से 21 अप्रैल 2026 के बीच मुंबई में 1,773 मलेरिया केस दर्ज किए गए हैं, जो महाराष्ट्र में सबसे अधिक हैं।
मलेरिया बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण, कंस्ट्रक्शन साइट्स पर जमा पानी और देरी से होने वाली जांच इसके मुख्य कारण हैं।