Maharashtra: मुंबई के माहिम इलाके में एक पुरानी हवेली ‘Nurie Villa’ से कुछ ऐसे पत्र मिले हैं जिन्होंने इतिहास के एक गुमनाम पन्ने को खोल दिया है। 54 साल के Owais Shakir Nurie को इन पत्रों के जरिए पता चला कि उन
Maharashtra: मुंबई के माहिम इलाके में एक पुरानी हवेली ‘Nurie Villa’ से कुछ ऐसे पत्र मिले हैं जिन्होंने इतिहास के एक गुमनाम पन्ने को खोल दिया है। 54 साल के Owais Shakir Nurie को इन पत्रों के जरिए पता चला कि उनके दादा Barrister Mohammed Yaseen (M.Y.) Nurie देश की आजादी की लड़ाई के एक बड़े योद्धा थे। इन चिट्ठियों में देश के कई बड़े नेताओं के साथ उनके रिश्तों और जিন্নह के खिलाफ उनकी लड़ाई का जिक्र है।
कौन थे Barrister M.Y. Nurie और क्या था उनका योगदान
M.Y. Nurie का जन्म 1895 में हुआ था और उन्होंने अपनी पढ़ाई Aligarh Muslim University और इंग्लैंड से पूरी की थी। वे 1937 में Ahmedabad से MLA चुने गए थे और B.G. Kher की कैबिनेट में लोक निर्माण मंत्री भी रहे। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें दो साल के लिए जेल भेजा गया था, जहाँ से वे मई 1944 में रिहा हुए। उन्होंने 1946 के चुनावों में मुस्लिम लीग के खिलाफ मुस्लिम वोटों को एकजुट करने के लिए All India Muslim Majlis की स्थापना की थी।
किन बड़े नेताओं से जुड़े थे उनके संबंध
Nurie Villa में मिले इन पत्रों से पता चलता है कि M.Y. Nurie का संपर्क देश के दिग्गज नेताओं से था। इन पत्रों में Jawaharlal Nehru, Sardar Vallabhbhai Patel, Lal Bahadur Shastri, Morarji Desai और V.K. Krishna Menon जैसे बड़े नाम शामिल हैं। Owais Nurie बताते हैं कि उनके दादा ने Muhammad Ali Jinnah का डटकर मुकाबला किया था, जिसके कारण जিন্নह ने उन्हें अपना सबसे कड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया था।
परिवार की अब क्या मांग है
Owais Nurie का कहना है कि उनका परिवार किसी विशेष सुविधा या लाभ की इच्छा नहीं रखता है। वे सिर्फ यह चाहते हैं कि उनके दादा के योगदान को पहचाना जाए और उन्हें वह सम्मान मिले जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने साफ किया कि वे केवल पहचान, सम्मान और यादों की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनके दादा एक ऐसे गुमनाम नायक थे जिन्होंने देश के लिए बड़ा काम किया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
M.Y. Nurie ने आजादी की लड़ाई में क्या भूमिका निभाई थी
वे 1937 में अहमदाबाद से MLA रहे और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दो साल जेल में रहे। उन्होंने मुस्लिम लीग के खिलाफ All India Muslim Majlis बनाई और जিন্নह का कड़ा विरोध किया।
इन ऐतिहासिक पत्रों का पता कैसे चला
मुंबई के माहिम स्थित Nurie Villa में उनके पोते Owais Shakir Nurie को पुराने पत्रों का एक ढेर मिला, जिसमें नेहरू और पटेल जैसे नेताओं के साथ उनके संवाद दर्ज थे।