Maharashtra: मुंबई की लोकल ट्रेनों में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। चर्चगेट-विरार और CSMT-कल्याण जैसे भीड़भाड़ वाले रूटों को अब जमीन के नीचे यानी अंडरग्राउंड ले जाने पर विचार किया जा रहा है। लोकल ट्रेनों में बढ़
Maharashtra: मुंबई की लोकल ट्रेनों में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। चर्चगेट-विरार और CSMT-कल्याण जैसे भीड़भाड़ वाले रूटों को अब जमीन के नीचे यानी अंडरग्राउंड ले जाने पर विचार किया जा रहा है। लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ और पटरियों की कमी की वजह से रेलवे अब इस विकल्प को देख रहा है ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
ट्रेनों को अंडरग्राउंड करने की जरूरत क्यों पड़ी?
मुंबई की लोकल ट्रेनों में पीक ऑवर्स के दौरान इतनी भीड़ होती है कि एक स्क्वायर मीटर में 16 यात्री तक सफर करते हैं, जिसे सुपर-डेंस क्रश लोड कहा जाता है। जमीन के ऊपर नई पटरियां बिछाना अब मुश्किल हो गया है क्योंकि जमीन महंगी है और कानूनी विवादों के कारण काम में देरी होती है। अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनने से लोकल ट्रेनों को मालगाड़ियों और लंबी दूरी की ट्रेनों से अलग किया जा सकेगा, जिससे ट्रेनें समय पर चलेंगी और पूरी तरह AC सिस्टम लागू करना आसान होगा।
अब तक क्या तैयारी हुई है और कौन करेगा काम?
वेस्टर्न रेलवे (WR) और सेंट्रल रेलवे (CR) इस योजना के लिए फिजिबिलिटी स्टडी यानी व्यवहार्यता अध्ययन की तैयारी कर रहे हैं। WR ने इसके लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी मांगी है और CR भी जल्द ही ऐसा करेगा। MRVC ने चर्चगेट से मुंबई सेंट्रल के बीच 5 किलोमीटर के अंडरग्राउंड हिस्से के लिए स्टडी शुरू कर दी है।
- Western Railway: चर्चगेट-विरार कॉरिडोर की जिम्मेदारी।
- Central Railway: CSMT-कल्याण कॉरिडोर की जिम्मेदारी।
- MRVC: फिजिबिलिटी स्टडी और तकनीकी जांच का काम।
- रेलवे मंत्रालय और राज्य सरकार: अंतिम फैसले लेने वाली अथॉरिटी।
लागत और आने वाली चुनौतियां क्या हैं?
अंडरग्राउंड सिस्टम बनाना काफी महंगा काम है। एक किलोमीटर के निर्माण में करीब 1,100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जो कि एलिवेटेड (ऊपर उठने वाले) ट्रैक से 3-4 गुना ज्यादा है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि जमीन अधिग्रहण और अतिक्रमण की समस्याओं से बचने के लिए यह सबसे सही रास्ता है। मुंबई में एक्वा लाइन मेट्रो के सफल निर्माण के बाद अब रेलवे को भी भरोसा है कि घने शहरी इलाकों में टनल बनाना संभव है।