Maharashtra: मुंबई के देवनार और कंजुरमार्ग जैसे डंपिंग ग्राउंड अब पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन जगहों से निकलने वाली मीथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। यह
Maharashtra: मुंबई के देवनार और कंजुरमार्ग जैसे डंपिंग ग्राउंड अब पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन जगहों से निकलने वाली मीथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। यह गैस कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले 80 गुना ज्यादा असरदार है, जिससे शहर की हवा और सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
मुंबई के डंपिंग ग्राउंड में क्या समस्या है?
UCLA के STOP Methane Project की रिपोर्ट में महाराष्ट्र के लैंडफिल को दुनिया के टॉप 25 ‘सुपर-पॉल्यूटिंग’ स्थलों में रखा गया है। ISRO के सैटेलाइट डेटा से पता चला है कि कंजुरमार्ग लैंडफिल से आधिकारिक अनुमान के मुकाबले 10 गुना ज्यादा मीथेन गैस निकल रही है। देवनार और कंजुरमार्ग में अक्सर आग लगना और जहरीला धुआं निकलना आम बात हो गई है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों की सेहत को खतरा है।
BMC इसे ठीक करने के लिए क्या कर रही है?
नगर निगम (BMC) अब इन गैसों को रोकने के लिए बायो-माइनिंग और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। कमिश्नर भूषण गगराणी ने देवनार डंपिंग ग्राउंड में एक बायो-मेथेनेशन प्रोजेक्ट को तेज करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रोजेक्ट की खास बातें नीचे दी गई हैं:
- यह प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
- रोजाना 1,000 टन कचरे से कुकिंग गैस बनाई जाएगी।
- महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए 8 हेक्टेयर जमीन दी है।
- इस काम में Mahanagar Gas Limited (MGL) पार्टनर के तौर पर जुड़ी है।
मीथेन गैस को कम करने के वैश्विक और कानूनी कदम
Climate and Clean Air Coalition (CCAC) ने ‘बायो-कवर सिस्टम’ का सुझाव दिया है, जिससे मीथेन उत्सर्जन को 50% तक कम किया जा सकता है। वहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ISRO के डेटा के आधार पर जांच समितियां बनाई हैं। कंजुरमार्ग लैंडफिल को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं (PIL) भी लंबित हैं, जिन पर सुनवाई चल रही है।