Maharashtra: मुंबई के कुर्ला और दादर रेलवे स्टेशन पर सोमवार को दो अलग-अलग घटनाओं में नाबालिग लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की गई। पीड़ित लड़कियों में एक 10 साल की बच्ची और एक कॉलेज जाने वाली किशोरी शामिल है। सरकारी रेलवे पुलि
Maharashtra: मुंबई के कुर्ला और दादर रेलवे स्टेशन पर सोमवार को दो अलग-अलग घटनाओं में नाबालिग लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की गई। पीड़ित लड़कियों में एक 10 साल की बच्ची और एक कॉलेज जाने वाली किशोरी शामिल है। सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दोनों मामलों में 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें सेशन कोर्ट में पेश किया।
घटनाएं कहां और कब हुईं?
ये दोनों वारदातें सोमवार, 18 मई 2026 को मुंबई के भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर हुईं। पहली घटना Kurla स्टेशन पर हुई जिसमें 10 साल की बच्ची को निशाना बनाया गया, जबकि दूसरी घटना Dadar स्टेशन पर एक टीनेजर कॉलेज छात्रा के साथ हुई। पुलिस ने शिकायत मिलने के तुरंत बाद जांच शुरू की और आरोपियों को पकड़ लिया।
POCSO एक्ट और कानूनी प्रावधान क्या हैं?
भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को POCSO एक्ट, 2012 के तहत देखा जाता है। इस कानून के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। इस एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न के मामलों में 3 से 5 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर मामलों में सजा और भी सख्त हो सकती है।
जांच और अदालती प्रक्रिया कैसे काम करती है?
POCSO एक्ट के तहत ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए गए हैं ताकि बच्चों को संवेदनशीलता के साथ न्याय मिल सके। नियम के अनुसार, इन मामलों की जांच दो महीने के भीतर और ट्रायल एक साल के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा जाता है। कानूनन, ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने पर रिपोर्ट करना अनिवार्य है, वरना रिपोर्ट न करने वाले पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई की इन घटनाओं में पुलिस ने कितनी देर में गिरफ्तारी की?
सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने कुर्ला और दादर स्टेशन की दोनों घटनाओं में शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
नाबालिगों के खिलाफ छेड़छाड़ के मामलों में कौन सा कानून लागू होता है?
भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए POCSO एक्ट, 2012 लागू होता है, जिसमें सख्त सजा और त्वरित सुनवाई का प्रावधान है।