Maharashtra: मुंबई की कोली महिलाओं ने पारंपरिक मछली बेचने के काम को अब एक आधुनिक बिजनेस का रूप दे दिया है। उन्होंने Daryavardi Producer Company Limited (DPCL) नाम की कंपनी बनाई है, जिसका मकसद समुदाय के पुराने व्यापार को
Maharashtra: मुंबई की कोली महिलाओं ने पारंपरिक मछली बेचने के काम को अब एक आधुनिक बिजनेस का रूप दे दिया है। उन्होंने Daryavardi Producer Company Limited (DPCL) नाम की कंपनी बनाई है, जिसका मकसद समुदाय के पुराने व्यापार को कॉर्पोरेट तरीके से चलाना है। यह महिलाओं द्वारा संचालित कंपनी अब मुंबई और पुणे जैसे शहरों में अपने उत्पाद पहुंचा रही है।
DPCL कंपनी कैसे काम करती है और इसकी कमाई क्या है?
इस कंपनी की शुरुआत अप्रैल 2023 में सिर्फ 1 लाख रुपये की पूंजी से हुई थी, जिसमें 10 महिला निदेशकों ने 10-10 हजार रुपये लगाए थे। अब इस कंपनी में 1,000 से ज्यादा शेयरधारक जुड़ चुके हैं। यह 50 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों (SHG) का एक बड़ा नेटवर्क है, जो मछली पकड़ने से लेकर मसाला बनाने और प्रोसेसिंग तक का काम देखते हैं। कंपनी ने 2026 की आखिरी तिमाही में 20 लाख रुपये का राजस्व कमाया है।
बिजनेस को बढ़ाने के लिए क्या नए कदम उठाए गए?
कंपनी ने अपने काम करने के तरीके को आधुनिक बनाया है। अब ऑर्डर WhatsApp और Google Forms के जरिए लिए जाते हैं और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल होता है। महिलाओं को पैकेजिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि मछली की शेल्फ लाइफ बढ़ सके और ग्राहक का भरोसा बढ़े। इसके अलावा, कंपनी ने कोली-थीम वाले बुफे, फूड फेस्टिवल में स्टॉल और ऑनलाइन सेल जैसे नए रास्ते चुने हैं।
सरकारी मदद और भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
BMC ने 2023 में सीफूड प्लाजा का विचार शुरू किया था और फरवरी 2025 के बजट में कोलीवाडा और गावथानों के बुनियादी ढांचे के लिए 25 करोड़ रुपये दिए थे। DPCL अब Agri-Business Incubation Centre (CIFE) का हिस्सा है और टिकाऊ पैकेजिंग के लिए Indian Institute of Packaging (IIP) के साथ काम कर रही है। आने वाले समय में कंपनी क्लाउड किचन शुरू करने और निर्यात (Export) बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Daryavardi Producer Company Limited (DPCL) क्या है?
यह मुंबई की पहली फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन है, जिसे कोली महिलाओं ने मिलकर बनाया है। यह अमूल मॉडल पर आधारित एक कम्युनिटी-ओन्ड एंटरप्राइज है।
इस कंपनी से जुड़ी महिलाओं को क्या फायदा हो रहा है?
महिलाएं मसाला, रोटी और अचार बनाकर रोजाना 500 से 600 रुपये कमा रही हैं। साथ ही उन्हें आधुनिक पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग की ट्रेनिंग मिल रही है।