Mumbai के KEM Hospital का नाम बदलने पर बवाल, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किंग एडवर्ड को कहा ‘किंग कसाब’

Maharashtra: मुंबई के मशहूर KEM Hospital का नाम बदलने की मांग ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने अस्पताल के नाम में मौजूद किंग एडवर्ड VII को ‘किंग कसाब’

Maharashtra: मुंबई के मशहूर KEM Hospital का नाम बदलने की मांग ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने अस्पताल के नाम में मौजूद किंग एडवर्ड VII को ‘किंग कसाब’ बताते हुए उन्हें भारत को लूटने वाला कहा है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हंगामा मच गया है और विपक्षी दल इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

मामला तब और गरमा गया जब 23 जून 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने प्रस्ताव रखा कि 100 साल पुराने इस अस्पताल का नाम बदलकर ‘कौशल्याश्रेष्ठ एकलव्य मेमोरियल हॉस्पिटल’ कर दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि किंग एडवर्ड VII गुलामी का प्रतीक थे और उन्होंने अस्पताल के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी थी। हालांकि, लोढ़ा ने यह साफ किया कि नाम बदलने के बाद भी अस्पताल के लिए इस्तेमाल होने वाला छोटा नाम ‘KEM’ ही रहेगा।

इस बयान पर शिव सेना (UBT) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एमएलसी मिलिंद नरवेकर ने सवाल किया कि क्या किंग एडवर्ड कोई आतंकवादी थे, जबकि सचिन अहिर ने पलटवार करते हुए मांग की कि लोढ़ा परिवार से जुड़ी संपत्तियों जैसे ‘ट्रम्प टॉवर’ और ‘वर्ल्ड वन’ का नाम भी बदला जाना चाहिए।

दूसरी तरफ, अस्पताल के पुराने छात्रों और डॉक्टरों की संस्था MARD ने भी इस बदलाव का विरोध किया है। उनका कहना है कि नाम बदलने से अस्पताल की विरासत कम होगी और डिग्री व सर्टिफिकेट जैसे प्रशासनिक कामों में दिक्कत आएगी। डॉक्टरों का मानना है कि नाम बदलने के बजाय अस्पताल के बुनियादी ढांचे और मरीजों की देखभाल पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

सरकार की तरफ से इस पर सावधानी बरती जा रही है। उद्योग मंत्री उदय सामंत और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि अभी नाम बदलने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि, BMC की हेल्थ कमेटी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, लेकिन अब इसे नगर निगम कमिश्नर और BMC जनरल बॉडी से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। सरकार ने कहा है कि वह कानूनी और ऐतिहासिक पहलुओं को देखने के बाद मुंबईकरों की इच्छा के अनुसार फैसला लेगी।