Mumbai के Kanjurmarg लैंडफिल से कम हुई बदबू, जुलाई में नहीं मिली एक भी शिकायत

Maharashtra: मुंबई के कंजुरमार्ग लैंडफिल इलाके में रहने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। यहां लंबे समय से फैल रही बदबू की शिकायतों में भारी कमी आई है। BMC के आंकड़ों के मुताबिक, भारी मानसून की बारिश के बावजूद जुलाई 2026

Maharashtra: मुंबई के कंजुरमार्ग लैंडफिल इलाके में रहने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। यहां लंबे समय से फैल रही बदबू की शिकायतों में भारी कमी आई है। BMC के आंकड़ों के मुताबिक, भारी मानसून की बारिश के बावजूद जुलाई 2026 में अब तक एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई है। यह सुधार बॉम्बे हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद देखने को मिला है।

इस साल की शुरुआत में बॉम्बे हाई कोर्ट ने लैंडफिल की बदबू को रोकने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने और तुरंत कदम उठाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने दिसंबर 2025 में प्रशासन को फटकार लगाते हुए वैज्ञानिक तरीके अपनाने और ‘प्रदूषक भुगतान’ (polluter pays) सिद्धांत को लागू करने को कहा था। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को एक 24 घंटे की हेल्पलाइन और ईमेल सिस्टम शुरू करने का भी निर्देश दिया था, ताकि लोगों की शिकायतों का एक घंटे के भीतर जवाब दिया जा सके।

बदबू को कम करने के लिए BMC और लैंडफिल ऑपरेटर ने कई कदम उठाए हैं। इसमें बायो-एंजाइम का छिड़काव, निष्क्रिय सेल पर मिट्टी की बेहतर परत चढ़ाना और मिस्टिंग कैनन का इस्तेमाल करना शामिल है। साथ ही, एक बफर जोन बनाने के लिए 5,029 पेड़ लगाए गए हैं और 10,000 और लगाने का लक्ष्य है।

शिकायतों में आई कमी का ब्योरा नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:

महीना शिकायतों की संख्या
जनवरी 555
फरवरी 811
मार्च 616
अप्रैल 435
मई 320
जून 204
जुलाई 0 (अब तक)

भविष्य के लिए कोर्ट ने एक बड़ा प्लान मंजूर किया है, जिससे कंजुरमार्ग लैंडफिल पर कचरे की निर्भरता 80% तक कम की जाएगी। इसके लिए वेस्ट-टू-एनर्जी और कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। हालांकि, एक्सपर्ट प्रकाश राय का कहना है कि पेड़ लगाने से बदबू फैलने में कमी आती है, लेकिन गैस के निकलने के मुख्य स्रोत को रोकने के लिए इंजीनियरिंग समाधान जरूरी हैं। स्थानीय लोग बदबू कम होने से खुश हैं, लेकिन मीथेन उत्सर्जन को लेकर अब भी चिंतित हैं।