Maharashtra: मुंबई के कंजुरमार्ग स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदूषण और बदबू की शिकायतों के बीच मॉनिटरिंग कमेटी ने बीएमसी (BMC) को 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत ग्रीन बेल्ट
Maharashtra: मुंबई के कंजुरमार्ग स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदूषण और बदबू की शिकायतों के बीच मॉनिटरिंग कमेटी ने बीएमसी (BMC) को 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत ग्रीन बेल्ट डेवलपमेंट प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। 8 मई 2026 को हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है ताकि इलाके में पर्यावरण की स्थिति को सुधारा जा सके और लोगों को प्रदूषण से मुक्ति मिल सके।
कंजुरमार्ग प्लांट के लिए क्या हैं नए निर्देश?
मॉनिटरिंग कमेटी ने बीएमसी को आदेश दिया है कि वह प्लांट के पास एक व्यवस्थित ग्रीन बेल्ट बनाए। इसमें तीन स्तरों पर पौधे लगाए जाएंगे जो प्रदूषण सोखने में सक्षम होंगे। इसके अलावा कमेटी ने और भी कई निर्देश दिए हैं:
- बीएमसी को अगले 15 दिनों में ग्रीन बेल्ट का पूरा प्लान जमा करना होगा।
- रात 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कचरे की क्वालिटी और बदबू की जांच के लिए कर्मचारी तैनात रहेंगे।
- मीथेन गैस के रिसाव को रोकने के लिए NEERI की मदद से ऑडिट किया जाएगा।
- प्लांट के अंदर खाद का इस्तेमाल करके ही पौधरोपण किया जाएगा।
बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्ती का हुआ असर
इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने काफी कड़ा रुख अपनाया है। 7 मई 2026 को कोर्ट ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को फटकार लगाई थी कि उन्होंने बदबू और प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने आदेश दिया है कि रोजाना प्रदूषण और गैस उत्सर्जन की निगरानी की जाए। इससे पहले कोर्ट ने साइट के 119.91 हेक्टेयर हिस्से को प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट घोषित किया था। अब बीएमसी को दो हफ्ते के भीतर मीथेन गैस को कंट्रोल करने का सिस्टम भी बनाना होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कंजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड को लेकर कमेटी ने बीएमसी को क्या समय सीमा दी है?
मॉनिटरिंग कमेटी ने बीएमसी को 15 दिनों के भीतर ग्रीन बेल्ट बनाने का प्लान देने और दो हफ्तों के भीतर मीथेन गैस रोकने का मैकेनिज्म तैयार करने का समय दिया है।
इस प्रोजेक्ट में NEERI की क्या भूमिका होगी?
NEERI कमेटी की मदद करेगी ताकि तीन लेयर वाला ग्रीन बेल्ट बनाया जा सके। साथ ही वह ड्रोन और हीट सेंसर जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके बदबू और मीथेन गैस के स्रोतों की पहचान करेगी।