Mumbai ITAT का बड़ा फैसला, किरायेदार को मिला टैक्स में आराम; 38.62 लाख की प्रॉपर्टी बिक्री पर मिली राहत
Finance: मुंबई के इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक किरायेदार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। यह मामला किरायेदारी के अधिकार छोड़ने के बदले मिली प्रॉपर्टी की बिक्री और उस पर लगने वाले टैक्स से जुड़ा था। कोर्ट ने
Finance: मुंबई के इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक किरायेदार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। यह मामला किरायेदारी के अधिकार छोड़ने के बदले मिली प्रॉपर्टी की बिक्री और उस पर लगने वाले टैक्स से जुड़ा था। कोर्ट ने माना कि किरायेदारी के अधिकार एक पूंजीगत संपत्ति (Capital Asset) हैं, जिससे टैक्स की गणना में बड़ा बदलाव आया है।
मामला घनश्याम नाम के एक व्यक्ति का था, जिन्होंने अपनी किरायेदारी के अधिकार मकान मालिक को सौंप दिए थे। इसके बदले उन्हें एक प्रॉपर्टी मिली, जिसे बाद में 38.62 लाख रुपये में बेचा गया। इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी (AO) का तर्क था कि इस नई प्रॉपर्टी को पाने के लिए किरायेदार ने कोई पैसा नहीं दिया था, इसलिए उसकी अधिग्रहण लागत (Cost of Acquisition) शून्य होनी चाहिए। अगर लागत शून्य होती, तो पूरे 38.62 लाख रुपये पर भारी टैक्स देना पड़ता।
ITAT मुंबई ने इस तर्क को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि जब किरायेदारी के अधिकारों को पूंजीगत संपत्ति माना गया है, तो उसकी आर्थिक वैल्यू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि किरायेदारी के अधिकारों के बाजार मूल्य (Fair Market Value) को ही अधिग्रहण लागत माना जाए, जिससे किरायेदार की टैक्स देनदारी काफी कम हो गई।
टैक्स राहत से जुड़ी मुख्य बातें:
- संपत्ति की प्रकृति: किरायेदारी के अधिकार इनकम टैक्स एक्ट की धारा 2(14) के तहत पूंजीगत संपत्ति माने गए।
- टैक्स का प्रकार: इस लेनदेन को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ के बजाय ‘कैपिटल गेन’ (पूंजीगत लाभ) के तहत टैक्स किया जाएगा।
- धारा 54F का लाभ: यदि किरायेदार इस पैसे को किसी नए रिहायशी मकान में निवेश करता है, तो उसे धारा 54F के तहत टैक्स छूट मिल सकती है।
- अदालती फैसला: यह फैसला 8 मई 2026 को सुनाया गया, जिसमें व्यावसायिक और कानूनी वास्तविकता को प्राथमिकता दी गई।
इस फैसले का असर उन सभी लोगों पर पड़ सकता है जो पुराने किरायेदारी समझौतों के तहत अपनी प्रॉपर्टी या अधिकार छोड़कर नया घर लेते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में मिले मुआवजे या प्रॉपर्टी को कैपिटल गेन के नियमों के हिसाब से ही देखा जाना चाहिए।