Mumbai के Govandi-Mankhurd इलाके में बड़ी संख्या में अवैध स्कूल, BJP नेता किरीट सोमैया ने लगाया गंभीर आरोप

Maharashtra/Mumbai: मुंबई के एम-ईस्ट वार्ड यानी गोवंडी, मानखुर्द और देवनार के इलाकों में अवैध स्कूलों का बड़ा जाल फैला हुआ है। बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने दावा किया है कि पिछले चार सालों में बीएमसी द्वारा

Maharashtra/Mumbai: मुंबई के एम-ईस्ट वार्ड यानी गोवंडी, मानखुर्द और देवनार के इलाकों में अवैध स्कूलों का बड़ा जाल फैला हुआ है। बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने दावा किया है कि पिछले चार सालों में बीएमसी द्वारा घोषित कुल 849 अनधिकृत स्कूलों में से 34 प्रतिशत अकेले इसी इलाके में हैं। सोमैया ने इस स्थिति को लेकर बीएमसी प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

किरीट सोमैया ने बीएमसी की शिक्षा विभाग की चीफ अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि पिछले चार शैक्षणिक वर्षों में एम-ईस्ट वार्ड के 289 स्कूलों को अवैध घोषित किया गया था। सोमैया के मुताबिक, साल 2020-21 में 67, 2022-23 में 100, 2023-24 में 57 और 2025-26 में 65 स्कूलों को अवैध पाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएमसी हर साल लिस्ट जारी करती है और नोटिस भेजती है, लेकिन कई स्कूल अब भी बिना किसी डर के चल रहे हैं। सोमैया ने इसे ‘स्कूल जिहाद’ करार देते हुए कहा कि कुछ संस्थान अवैध ढांचों से चल रहे हैं और फर्जी सर्टिफिकेट बांट रहे हैं।

इस मामले पर बीएमसी की डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर (शिक्षा) प्राची जांभेकर ने बताया कि इस साल 43 ऐसे स्कूलों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि एम-ईस्ट वार्ड में बड़ी संख्या में झुग्गियां होने की वजह से यहां अवैध स्कूलों की संख्या ज्यादा है। बीएमसी ने यह भी साफ किया कि जिन स्कूलों को बंद किया गया, वहां के छात्रों को नगर निगम के स्कूलों में शिफ्ट किया गया है।

अप्रैल 2026 में बीएमसी ने मुंबई के 164 अनधिकृत स्कूलों की लिस्ट जारी की थी, जिनमें से 57 स्कूल गोवंडी-मानखुर्द बेल्ट के थे। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के क्लॉज 18 के तहत इन पर कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई से करीब 80 हजार छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। हालांकि, बीएमसी ने 48 स्कूलों को नियमित करने का प्रस्ताव अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार को भेजा था, जिस पर मंजूरी का इंतजार है।

आरटीआई एक्टिविस्ट नितिन दलवी का कहना है कि कई स्कूल बुनियादी सुविधाओं के बिना चल रहे हैं, इसलिए उन्हें मान्यता नहीं मिल पा रही है। वहीं वॉचडॉग फाउंडेशन ने सरकार से अपील की है कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए इन स्कूलों के लिए कोई एमनेस्टी स्कीम (माफी योजना) लाई जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके।