Mumbai की हाउसिंग सोसाइटी की मनमानी पर कोर्ट सख्त, 17.26 लाख के मेंटेनेंस बकाया पर उठाए सवाल

Maharashtra: मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर मांगे गए लाखों रुपयों के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने संताक्रूज वेस्ट की Vatsala Niwas Co-operat

Maharashtra: मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर मांगे गए लाखों रुपयों के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव अपीलेट कोर्ट ने संताक्रूज वेस्ट की Vatsala Niwas Co-operative Housing Society की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने सोसाइटी द्वारा बताए गए 15.33 लाख रुपये के अस्पष्ट बकाये पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पूरा मामला पूनम सोनी और पूनम सोनी सिग्नेचर लाइन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जो सोसाइटी में यूनिट 201 और 203 के मालिक हैं। कोर्ट ने पाया कि 11 दिसंबर 2023 के बिल में यूनिट 201 पर कोई बकाया नहीं था, लेकिन अचानक 21 मार्च 2024 के बिल में 15.33 लाख रुपये का बकाया दिखा दिया गया। सोसाइटी इस रकम का कोई हिसाब या ब्रेकअप नहीं दे पाई और न ही यह बता पाई कि यह चार्ज सिर्फ इसी यूनिट पर क्यों लगाया गया।

यूनिट मालिकों का कहना था कि उन्होंने पहले ही सोसाइटी के खर्चों और रेगुलराइजेशन के लिए 36.44 लाख रुपये चुका दिए हैं। इसके अलावा, सोसाइटी ने मेंटेनेंस चार्ज स्क्वायर फीट के आधार पर लगाए थे, जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेंटेनेंस शुल्क महाराष्ट्र सरकार के 29 अप्रैल 2000 के आदेश के अनुसार ही होने चाहिए।

इस फैसले के बाद अब सोसाइटी को सरकारी नियमों का पालन करना होगा। महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 1960 और मॉडल बाय-लॉज के तहत ही शुल्क तय किए जा सकते हैं। यह फैसला मुंबई और पूरे महाराष्ट्र की अन्य हाउसिंग सोसाइटीज के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहां अक्सर मेंटेनेंस बिलों में पारदर्शिता की कमी देखी जाती है।