Mumbai में किराया बढ़ा तो सपने हुए अधूरे, अब घर का किराया चुकाना ही बन गया सबसे बड़ा लक्ष्य

Maharashtra: मुंबई शहर में अपने सपनों को पूरा करने आने वाले युवाओं के लिए अब घर का किराया एक बड़ी मुसीबत बन गया है। हाल ही में जगृत थिरवानी नाम के एक व्यक्ति की बात सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिन्होंने कहा कि वह मुंबई बड़

Maharashtra: मुंबई शहर में अपने सपनों को पूरा करने आने वाले युवाओं के लिए अब घर का किराया एक बड़ी मुसीबत बन गया है। हाल ही में जगृत थिरवानी नाम के एक व्यक्ति की बात सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिन्होंने कहा कि वह मुंबई बड़े सपने लेकर आए थे, लेकिन अब उनकी प्राथमिकता सिर्फ फ्लैट का किराया चुकाना रह गया है। उन्होंने मजाक में सलाह दी कि अगर आप किराए के बोझ से बचना चाहते हैं, तो मुंबई के बाहर सपने देखें।

मुंबई अब दुनिया के सबसे महंगे रेंटल मार्केट में से एक बन चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ औसत मासिक किराया लगभग 60,777 रुपये तक पहुँच गया है, जो इसे टोक्यो जैसे शहरों से भी आगे और हांगकांग व सिंगापुर के बराबर खड़ा करता है। पिछले चार सालों में कई इलाकों में किराए में हर साल 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वर्ग के कई परिवार अपनी महीने की कमाई का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ किराए में दे रहे हैं, जिससे उनके पास बचत के लिए बहुत कम पैसे बचते हैं।

शहर में जमीन की कमी और समुद्र से घिरे होने के कारण मकानों की मांग ज्यादा और सप्लाई कम है। मालाबार हिल, कोलाबा, वर्ली सी फेस, बांद्रा वेस्ट और जुहू जैसे प्रीमियम इलाकों में किराया सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की वजह से किराए के घरों की संख्या और कम हो गई है।

किराये की इस समस्या को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल 2026 में कुछ कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किफायती रेंटल हाउसिंग की सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकार एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने वाली है जहाँ किराए के घरों की सही जानकारी मिलेगी ताकि बिचौलियों की जरूरत न पड़े। साथ ही, किराए से जुड़े विवादों को जल्दी सुलझाने के लिए 100 विशेष अदालतें बनाने की योजना है।

विषय विवरण/नियम
किराया सहायता (MHADA) खतरनाक इमारतों के निवासियों को 20,000 रुपये महीना सहायता
मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 सिक्योरिटी डिपॉजिट अधिकतम 2 महीने के किराए तक सीमित
किफायती घर की सीमा वर्तमान 45 लाख की सीमा को बढ़ाकर 80-90 लाख करने का सुझाव
विशेष अदालतें किराया विवादों के लिए 100 कोर्ट बनाने की तैयारी

किराए के अलावा बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या है। एक व्यक्ति ने शिकायत की कि वह 90,000 रुपये किराया देने के बाद भी अपनी हाई-राइज सोसाइटी में पानी की किल्लत झेल रहा है।