Maharashtra: मुंबई के माज़गांव और डोंगरी को जोड़ने वाला Hancock Bridge पिछले 10 सालों से अधूरा पड़ा है। जनवरी 2016 में पुराने पुल को गिराया गया था, लेकिन नया पुल अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इस वजह से यह महत्वपूर्ण रास्ता
Maharashtra: मुंबई के माज़गांव और डोंगरी को जोड़ने वाला Hancock Bridge पिछले 10 सालों से अधूरा पड़ा है। जनवरी 2016 में पुराने पुल को गिराया गया था, लेकिन नया पुल अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इस वजह से यह महत्वपूर्ण रास्ता आधी क्षमता पर चल रहा है और लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है।
पुल के काम में देरी क्यों हो रही है?
पुल के निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट रिहैबिलिटेशन यानी लोगों को बसाने की समस्या है। करीब 39 इमारतों (3 MHADA और 36 BMC की) को हटाना जरूरी है, जिसके लिए वहां रहने वाले लोगों को घर देना बाकी है। इसके अलावा BMC, MHADA और Central Railway के बीच तालमेल की कमी और डिजाइन में बदलाव की वजह से काम समय पर पूरा नहीं हुआ। CAG की 2022 की रिपोर्ट में भी BMC की प्लानिंग को गलत बताया गया था।
लागत में कितनी बढ़ोतरी हुई?
समय बढ़ने के साथ इस प्रोजेक्ट का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 2016 में इस पुल की अनुमानित लागत 41.31 करोड़ रुपये थी, जो 2026 तक बढ़कर 100 करोड़ रुपये पहुंच गई। यह करीब 138% की बढ़ोतरी है। लागत बढ़ने के मुख्य कारणों में लोहे के गर्डर का वजन बढ़ाना और रिहैबिलिटेशन का बढ़ता खर्च शामिल है।
| विवरण |
जानकारी |
| पुराना पुल गिराया गया |
जनवरी 2016 |
| एक हिस्सा खुला |
अगस्त 2022 |
| शुरुआती बजट (2016) |
41.31 करोड़ रुपये |
| मौजूदा बजट (2026) |
100 करोड़ रुपये |
| कुल रुकावट |
39 इमारतें |
| वर्तमान स्थिति |
आधी क्षमता (2 लेन चालू) |
ताजा अपडेट और अधिकारियों का क्या कहना है?
दिसंबर 2025 में BMC के एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर अभिजीत बांगर ने अधिकारियों को काम जल्द पूरा करने और टेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे। वहीं, अप्रैल 2026 में Central Railway ने वंदे भारत मेंटेनेंस यार्ड के लिए पुल के पास से 45 अवैध ढांचे हटाए। दूसरी ओर, मंबईदेवी के MLA अमीन पटेल और RTI एक्टिविस्ट कमलकर शेनॉय ने BMC के दावों को गलत बताया है और कहा है कि काम काफी समय से रुका हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Hancock Bridge अभी किस स्थिति में है?
पुल अभी आधा अधूरा है और केवल दो लेन ही ट्रैफिक के लिए खुली हैं, जबकि योजना चार लेन की थी। रेलवे के ऊपर का ढांचा तैयार है लेकिन अप्रोच रोड का काम रिहैबिलिटेशन की वजह से रुका हुआ है।
पुल के बजट में इतनी वृद्धि क्यों हुई?
प्रोजेक्ट की लागत 41.31 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ रुपये हो गई। इसका कारण रिहैबिलिटेशन का बढ़ता खर्च, IIT-बॉम्बे के सुझाव पर लोहे के गर्डर का वजन बढ़ाना और काम में हुई लंबी देरी है।