Maharashtra: मुंबई की गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) के आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। पिछले पांच सालों में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के जरिए बच्चों की तस्करी के मामले सामने आए हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या लड़को
Maharashtra: मुंबई की गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) के आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। पिछले पांच सालों में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के जरिए बच्चों की तस्करी के मामले सामने आए हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले काफी ज्यादा रही है। पुलिस ने साल 2021 से अप्रैल 2026 के बीच बड़ी संख्या में बच्चों को बचाया है।
तस्करी के आंकड़े और पुलिस की कार्रवाई
मुंबई GRP की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने इस अवधि के दौरान तस्करी के 167 मामले दर्ज किए थे। पुलिस की तत्परता से इनमें से 97 प्रतिशत यानी 162 मामलों को सुलझा लिया गया है। फिलहाल पांच मामलों की जांच चल रही है और 34 मामले चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट में लंबित हैं।
| विवरण |
संख्या |
| कुल तस्करी की गई लड़कियां |
109 |
| कुल तस्करी की गई लड़के |
58 |
| कुल दर्ज मामले |
167 |
| सुलझाए गए मामले |
162 |
बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या नियम हैं
रेलवे ने बच्चों की सुरक्षा के लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) लागू किया है। इसके तहत अगर कोई बच्चा बिना किसी बड़े के रेलवे परिसर में मिलता है, तो पुलिस को 24 घंटे के भीतर उसे Child Welfare Committee (CWC) के सामने पेश करना जरूरी है।
तस्करी रोकने के लिए RPF ने देशभर में 750 से ज्यादा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स बनाई हैं। ये यूनिट्स स्थानीय पुलिस, NGO और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती हैं। महाराष्ट्र में Prerana, Prajwala India और CRY जैसे NGO भी बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास में मदद कर रहे हैं।
NCRB डेटा में महाराष्ट्र की स्थिति
CRY द्वारा किए गए 2024 के NCRB डेटा विश्लेषण में महाराष्ट्र बच्चों के खिलाफ अपराधों में देश में पहले स्थान पर रहा। यहां बच्चों के खिलाफ 24,171 मामले दर्ज हुए। लापता बच्चों में लड़कियों का हिस्सा बहुत ज्यादा था, खासकर 16 से 18 साल की किशोरियां सबसे ज्यादा प्रभावित पाई गईं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई GRP ने पिछले 5 साल में कितने बच्चों को तस्करी से बचाया?
मुंबई GRP के रिकॉर्ड के मुताबिक 2021 से अप्रैल 2026 के बीच कुल 167 बच्चों को बचाया गया, जिनमें 109 लड़कियां और 58 लड़के शामिल थे।
रेलवे स्टेशन पर अकेले मिले बच्चों के लिए क्या नियम है?
SOP के अनुसार, रेलवे परिसर में मिले किसी भी अकेले बच्चे को पुलिस को 24 घंटे के भीतर Child Welfare Committee (CWC) के सामने पेश करना अनिवार्य है।